गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम महेश्वर गुप्ता पिता गौरी शंकर गुप्ता, जगदीश राठिया पिता समुद साय राठिया,  हिमसागर राठिया पिता गुलाब राठिया बताया जा रहा है!

4 महीने पर 4 हाथियों की मौत हो चुकी है जो विभागीय कार्य शैली पर प्रश्नचिन्ह??

चंद्रशेखर जायसवाल

रायगढ़(गंगा प्रकाश)।  घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के ग्राम अमलीडीह ( सुमडा ) जंगल आरएफ 1275 में हांथी की करंट की चपेट में आने से मृत्यु हो गई है । बताना लाजमी होगा कि हांथी की मौत शुक्रवार की रात हो गई थी और वन विभाग के बीटगार्ड , सर्कल अधिकारी को ग्रामीणों के द्वारा जानकारी दी गई है जिससे प्रतीत होता है कि क्षेत्र के बीटगार्ड , सर्किल अधिकारी व उच्च अधिकारी किस तरह से अपने कर्तब्यों के प्रति कितने ईमानदार है । समरुमा से लेकर पंडरीपानी तक के जंगल क्षेत्र में आये दिन शिकारियों के द्वारा बरहा ( जंगली सूअर ) मारते रहते है कब सुअर मरते है तो कभी मानव । शिकार के लिए विद्युत करंट की आवश्यकता होती है जिसके लिए आये दिन करंट के लिए तार बिछाया जाता है जिसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को होती है जानकारी होने बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नही करने करने सहभागिता की तरफ इशारा करता है , ग्रामीणों का आरोप है कि घरघोडा रेंज छोटे से स्तर के बड़े अधिकारी का शिकारियों के साथ सांठगांठ होने की बात सामने आती रहती है आपको बता दे कि हांथी प्रभावित क्षेत्र के उच्च अधिकारियों के द्वारा हांथी की मौत में कुछ लोगो को बचाने का प्रयास किया जा रहा है । बताया जा रहा है कि छर्राटाँगर सर्किल डिप्टी रेंजर मुख्यालय ने नही होने के कारण घटना घटित हो रही जागरूकता में कमी को दर्शाता है ।

इन दिनों रायगढ़ वन विभाग किसी न किसी मामले को लेकर सुर्खियों में हैं बेशकीमती सागौन पेड़ की तस्करी का मामला हो या मादा हाथी की मौत का या फिर कागजों में डबरी का मामला लगभग इन सभी मामलों में वन विभाग के नुमाइंदों की कार्यशैली संदेश जनक है!  फिलहाल हम बात कर रहे हैं मादा हम हाथी की मौत के मामले की जिसमें करंट की चपेट में आने से मादा हाथी की मौत हो गई थी तथा वन विभाग के द्वारा जांच की जा रही थी! मादा हाथी के मौत के मामले में जो कार्यवाई सूत्रों के हवाले से निकल कर आ रही है वह अत्यंत ही संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है! हाथियों के मामले में मृत्यु के आसपास क्षेत्र में किसी भी बाहरी व्यक्ति को भटकने नहीं दिया जा रहा है यहां तक कि मीडिया को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है जो कई प्रश्नों को जन्म देती है, नर हाथी के मौत के मामले में मृत हाथी के एक तस्वीर भी बाहर नहीं निकल पाई है! हालांकि वन मंडल अधिकारी धरमजयगढ़ के द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नर हाथी की मिक होने की पुष्टि की है किंतु प्रेस रिलीज में कहीं पर भी यह नहीं दर्शाया गया है जी हाथी की मौत लगभग कितने दिनों पहले हुई है क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों ने दूरभाष पर हमें बताया है कि लगभग महीने भर पहले हाथी की मौत हो गई है! यही वजह होगी कि विवाह की किरकिरी ना हो इसलिए शायद मृत हाथी के शव का तस्वीर तक किसी को नहीं खींचने दिया गया!! बीते दिनों की मादा हाथी की मौत के कई दिनों बाद वन विभाग के नुमाइंदों को इस बात की भनक हुई, विभागीय नुमाइंदे सोते रहे और जंगल में मादा हाथी का शव सड़ता रहा शीर्षक तक मीडिया में प्रकाशित हुई सोशल मीडिया पर भी विभाग की जमकर किरकिरी हुई !! हाथियों मौत का कारण विद्युत करंट की चपेट में आने से हुई मतलब हाथी मानव द्वंद, मानव द्वारा ही कहीं अपने फसलों को बचाने के लिए तो कहीं अवैध शिकार करने के लिए विद्युत तार का उपयोग किया जा रहा है! बहुत ही कम समय में रायगढ़ जिले में 4 महीने पर 4 हाथियों की मौत हो चुकी है जो विभागीय कार्य शैली पर प्रश्नचिन्ह हैं!!


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