गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेशों में चल रहे एसआईआर लिए संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। आयोग ने पहले घोशित सभी तिथियों को एक हफ्ते बढ़ाकर नया शेड्यूल जारी किया है। अब 11 दिसंबर 2025 तक बीएलओ घर घर जाकर गणना फार्म वितरित और संग्रह करेंगे। इसके अलावा 11 दिसंबर 2025 तक जहां आवश्यक होगा, मतदान केन्द्रों की पुनर्व्यवस्था की जाएगी। छत्तीसगढ़ में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर मतदाताओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 2003 की वोटर लिस्ट में नाम होना अनिवार्य है। जिला प्रशासन ने स्पश्ट किया है कि 2003 की सूची में नाम न होने पर भी आपका वोट देने का अधिकार सुरक्षित है। एसआईआर फार्म भरने के लिए केवल वर्तमान वोटर आईडी का होना पर्याप्त है। कई लोग भ्रम में थे कि एसआईआर फार्म तभी वैलिड होगा जब 2003 की सूची में उनका या उनके परिवार का नाम हो। जिला प्रशासन के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है। उन्होंने बताया है कि तीन तरह की कैटेगरी है। पहला 2003 के वोटर लिस्ट में नाम है। दूसरा जिनके पेरेंट्स यानी माता-पिता का नाम नहीं मिल रहा। लेकिन ग्रैंड पेरेंट्स का नाम मिल रहा है तो भी काम चलेगा। अपने दादा-दादी, नाना-नानी किसी का भी नाम 2003 की लिस्ट में है, तो फार्म में उसका विवरण दर्ज करें और खुद को उससे लिंक करें। तीसरा किसी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिल रहा है। ऐसे केस में भी चिंता की जरूरत नहीं है। आप अपने वर्तमान वोटर आईडी के आधार पर फार्म भर दें। फार्म जमा होने के बाद जब नई मतदाता सूची प्रकाशित होगी, तो आपका नाम उसमें मौजूद रहेगा। नोटिस के बाद सत्यापन और दस्तावेज जमा करना होगा, नाम जुड़ जाएगालेकिन इसके लिए जिला स्तर पर एक और प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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