जगदलपुर (गंगा प्रकाश)। पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना लेकर बस्तर संभाग में शनिवार को ज्येष्ठ अमावस्या पर वट सावित्री व्रत श्रद्धा के साथ मनाया गया। हजारों सुहागिनों ने निर्जला उपवास रखकर बरगद के पेड़ की पूजा-अर्चना की।
जगदलपुर के राजेन्द्र नगर वार्ड निवासी सुहागिन कामिनी ठाकुर ने व्रत के महत्व पर जोर देते हुए कहा वट सावित्री व्रत पति-पत्नी के अटूट बंधन और विश्वास का प्रतीक है। बरगद की गहरी जड़ें और सदाबहार रहने की क्षमता हमें सिखाती है कि रिश्ते भी उतने ही मजबूत और स्थायी होने चाहिए।
उन्होंने बताया कि सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर महिलाएं वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होती हैं। कच्चे सूत को सात बार लपेटकर परिक्रमा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
कामिनी ठाकुर ने कहा पूरे दिन निर्जला रहकर हम संकल्प और समर्पण का संदेश देते हैं। यह व्रत हमें सिखाता है कि दृढ़ निश्चय और आस्था से हर बाधा दूर की जा सकती है।
जगदलपुर के साथ दरभा, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल समेत ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं ने सामूहिक पूजा की। शाम को पूजा संपन्न कर व्रत खोलने के बाद सुहागिनों ने एक-दूसरे को सुहाग सामग्री देकर सौभाग्य की कामना की।
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स्थानीय महिलाओं का कहना है कि नई पीढ़ी की भागीदारी से यह परंपरा और मजबूत हो रही है, जो बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ा रही है।
