राघवेंद्र सिंह

रायपुर (गंगा प्रकाश)। सेव फ्यूल, सेव नेचर,स्टे हेल्थी की सन्देश के साथ  संदीप बरनवाल के नेतृत्व में निकली साइकिल-यात्रा  700 किमी की सफर तय कर वाराणसी मे समाप्त हुआ । वर्तमान में जिस प्रकार से हम ईंधनो का अनावश्यक उपयोग कर रहे है, वो दिन दूर नहीं जब धरती से ये प्राकृतिक ईधन खत्म हो जायेंगे। और साथ ही इससे प्रकृति का सन्तुलन भी बिगड़ जायेगा।  हमें बेहतर पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए ईंधन की बचत करनी चाहिए इसी खूबसूरत सन्देश के साथ छत्तीसगढ़ से तीन सदस्यीय टीम जिसमे संदीप बरनवाल संभागीय लेखा अधिकारी लोक निर्माण, अनिल कुमार जल संसाधन संभाग एवं संकल्प दीक्षित संभागीय लेखाधिकारी विद्युत् यांत्रिकी,लाइट मशीनरी नलकूप संभाग द्वारा 12 फ़रवरी को सायकिल यात्रा प्रारम्भ की जो 700किमी की दुरी तय कर 19 फ़रवरी को वाराणसी उत्तरप्रदेश में समाप्त हुई । इस  दौरान प्राकृतिक ईंधन का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करने का सन्देश देते हुए उनके द्वारा कहा गया की  दिन-ब-दिन इंधन की खपत बढ़ती ही जा रही है और प्रकृति में इनकी मात्रा कम होती जा रही है। जनसंख्या के लगातार वृद्धि के कारण भी यह तेजी से खत्म हो रहे है। ईंधन के तेजी से उपभोग की वजह से ही आज पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में यदि हम चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में हम इंधन का उपयोग कर सके, तो इसके लिए हमें आज से ही ईंधन की बचत करना होगा।

परहेज की तकनीक इस समस्या का सबसे सरल समाधान हो सकता है। गंभीर परिस्थितियों में, ईंधन के उपयोग से बचना बहुत आवश्यक हो जाता है ताकि यह जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध हो सके। 2-3 किलोमीटर का सफर करने के लिए कार की जगह पैदल चलें। विलासितापूर्ण जीवन के लिए वैकल्पिक रास्ते खोजने की कोशिश करें, जैसे एयर कंडीशनर की जगह खुली खिड़की चुनें । घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एलईडी बल्ब और ट्यूबलाइट का उपयोग करें। ऊर्जा बचाने के लिए एयर कंडीशनर का उपयोग कम मात्रा में और हमेशा कम सेटिंग पर करें। उपयोग में न होने पर एयर कंडीशनर, लाइट और पंखे बंद कर दें। खाना पकाने और दोबारा गर्म करने के लिए बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल करें। खाना बनाते समय अपने खाना पकाने के बर्तनों को ढक कर रखें। इसके अलावा, आप अच्छी गुणवत्ता वाले तार का उपयोग कर बिजली बचा सकते हैं। आपको दफ्तरों में सोलर पैनल लगाना चाहिए और स्ट्रीट लाइट्स इंटेलिजेंट लाइट्स होनी चाहिए। उन्हें दिन के उजाले में अपने आप बंद हो जाना चाहिए। मूलतः ए. जी. छत्तीसगढ़ में कार्यरत इस दल ने छत्तीसगढ़ वापस होकर अपने खट्टे- मीठे अनुभवों को साझा किया जो काफ़ी प्रेरक है ।


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