सरपंच संघ, सचिव संघ और कर्मचारियों ने मंच साझा कर दिया भरोसे का संदेश
छुरा (गंगा प्रकाश)। जनपद पंचायत छुरा इन दिनों केवल स्थानीय प्रशासन का कार्यालय भर नहीं, बल्कि पूरे गरियाबंद जिले की राजनीति और पंचायत व्यवस्था का केंद्र बिंदु बन चुकी है। प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सतीष चन्द्रवंशी को लेकर उठे आरोपों के बीच गुरुवार को जनपद पंचायत कार्यालय परिसर उस समय ऐतिहासिक दृश्य का गवाह बना, जब सरपंच संघ, सचिव संघ और जनपद पंचायत के लगभग समस्त अधिकारी-कर्मचारी एक मंच पर आकर उनके समर्थन में खुलकर सामने आए। यह केवल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं थी, बल्कि पंचायत व्यवस्था के भीतर भरोसे और नेतृत्व के पक्ष में खुला शक्ति प्रदर्शन था।
जनपद पंचायत परिसर में सुबह से ही सरपंचों, पंचायत सचिवों और कर्मचारियों का जुटान शुरू हो गया था। दोपहर तक माहौल पूरी तरह बदल चुका था। जहां कुछ दिन पहले तक जनपद पंचायत छुरा प्रभारी सीईओ पर लगे आरोपों के कारण सुर्खियों में थी, वहीं अब पूरा पंचायत अमला एक सुर में उनके समर्थन में खड़ा नजर आया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सतीश चन्द्रवंशी के कार्यभार संभालने के बाद जनपद पंचायत छुरा में योजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्ट गति आई है। फाइलों के निराकरण से लेकर फील्ड लेवल मॉनिटरिंग तक, प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और संवाद दोनों मजबूत हुए हैं। वक्ताओं के अनुसार, लंबे समय बाद पंचायत स्तर पर ऐसा समन्वय देखने को मिला है, जिसमें सरपंच, सचिव और कर्मचारी स्वयं को सुना हुआ और समर्थित महसूस कर रहे हैं।
सचिव संघ का दो टूक समर्थन
सचिव संघ ब्लॉक अध्यक्ष चेतन सोनकर ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रभारी सीईओ का व्यवहार सचिवों के प्रति हमेशा सहयोगात्मक और मार्गदर्शक रहा है। उन्होंने कहा कि सतीष चन्द्रवंशी केवल फाइलों तक सीमित अधिकारी नहीं हैं, बल्कि ग्राम पंचायतों की जमीनी समस्याओं को समझने वाले अधिकारी हैं।
चेतन सोनकर ने कहा हाल के दिनों में जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। इससे पंचायत व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचाने और कर्मचारियों का मनोबल गिराने का प्रयास किया जा रहा है। सचिव संघ पूरी मजबूती से प्रभारी सीईओ के साथ खड़ा है और यह विश्वास दिलाता है कि उनके मार्गदर्शन में योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर हो रहा है।

सरपंच संघ का खुला ऐलान
सरपंच संघ ब्लॉक अध्यक्ष पन्ना लाल ध्रुव ने भी मंच से स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सीईओ के कार्यकाल में पंचायतों को प्रशासनिक सहयोग और स्पष्ट दिशा मिली है। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि न तो किसी सरपंच पर दबाव बनाया गया और न ही किसी प्रकार की अवैध वसूली की बात सही है।
पन्ना लाल ध्रुव ने कहा जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे जमीनी हकीकत से परे हैं। सरपंच संघ पूरी एकजुटता के साथ प्रभारी सीईओ के समर्थन में खड़ा है। हमें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में पंचायत व्यवस्था और मजबूत होगी।
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कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जनपद पंचायत के कर्मचारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कर्मचारियों ने कहा कि सतीष चन्द्रवंशी के आने के बाद कार्यालयीन कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है, फाइलों के लंबित मामलों में कमी आई है और योजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्ट दिशा मिली है।
कर्मचारियों का कहना था कि प्रभारी सीईओ नियमित रूप से कार्यालय और फील्ड दोनों स्तरों पर संवाद बनाए रखते हैं, जिससे समस्याओं का समाधान समय पर हो पा रहा है। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी तरह के राजनीतिक या व्यक्तिगत आरोपों के बजाय जमीनी कार्यप्रणाली के आधार पर अपना समर्थन दे रहे हैं।

खुद सीईओ का संयमित लेकिन स्पष्ट बयान
समर्थन के इस खुले प्रदर्शन के बाद प्रभारी सीईओ सतीष चन्द्रवंशी भी मीडिया के सामने आए। उन्होंने संयमित शब्दों में कहा कि जनपद पंचायत छुरा में जो भी कार्य किए जा रहे हैं, वे शासन के नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा मेरे विरुद्ध लगाए गए आरोपों को मैं निराधार मानता हूं। यदि किसी भी स्तर पर किसी को कोई शंका है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैं हर प्रकार की जांच के लिए तैयार हूं और पूरा सहयोग करूंगा। हमारा उद्देश्य केवल एक है—जनपद पंचायत छुरा में विकास कार्यों को गति देना और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना।
उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद के कारण जनहित के कार्य रुकने नहीं दिए जाएंगे।
बदला माहौल, बढ़ी सरगर्मी
जनपद पंचायत छुरा में यह घटनाक्रम केवल एक अधिकारी के समर्थन तक सीमित नहीं रहा। पंचायत अमले की इस एकजुटता ने पूरे जिले में संदेश दिया है कि प्रशासनिक स्तर पर सतीश चन्द्रवंशी को मजबूत समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक आरोपों के बीच यह समर्थन मामले की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है।
अब यह विवाद केवल आरोप और खंडन का नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था के भीतर विश्वास और नेतृत्व के प्रश्न का रूप ले चुका है। ऐसे में जिला प्रशासन और शासन की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। क्या पूरे मामले की औपचारिक जांच होगी, या समर्थन के इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन कोई स्पष्ट निर्णय लेगा—यह आने वाले दिनों में तय होगा।
फिलहाल इतना तय है कि जनपद पंचायत छुरा अब केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि जिलेभर में चर्चा का केंद्र बन चुकी है।

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