नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र देव जब धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में विचरण करते हैं, तो उस अवधि को पंचक कहा जाता है। पंचक को लगभग 5 दिनों तक चलने वाला समय माना जाता है, जिसमें विशेष प्रकार की ऊर्जा का प्रभाव माना जाता है।
इस बार पंचक 2026 की शुरुआत 21 जनवरी को रात 01:35 बजे हुई और इसका समापन 25 जनवरी को दोपहर 01:35 बजे होगा। ज्योतिषियों का कहना है कि इस दौरान कई प्रकार के कार्य वर्जित और अशुभ माने जाते हैं।
पंचक में कौन-से काम न करें
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यात्रा पर सावधानी:
धार्मिक मान्यता अनुसार, दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना गया है। पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करना वर्जित है। यदि किसी जरूरी काम से दक्षिण दिशा में जाना अनिवार्य हो, तो यात्रा से पहले हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी की पूजा और पंच प्रकार के फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। -
अन्य वर्जित काम:
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घर या व्यापार से जुड़े बड़े निर्णय या सौदे इस समय न करें।
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संपत्ति की खरीद-फरोख्त टालें।
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जोखिम वाले निवेश या नई परियोजनाओं की शुरुआत से बचें।
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ज्योतिषियों की सलाह
पंचक के दौरान सावधानी बरतने और शुभ कार्य टालने से नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है। पूजा, दान और साधु-संतों का सम्मान करना इस समय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
ध्यान रहे: पंचक का यह समय शक्ति और ऊर्जा की असामान्य गतिविधियों से जुड़ा होता है, इसलिए इस दौरान अपनी सभी योजनाओं में विवेक और संयम बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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