मामला क्या है
याचिकाकर्ताओं ने UGC के हालिया नियमों को चुनौती देते हुए कहा कि ये नियम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और समान अवसर के सिद्धांत को प्रभावित करते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और UGC से स्पष्ट जवाब मांगा और अगली सुनवाई तक नियमों के अमल पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां
“इस तरह के नियम लागू हुए तो सामाजिक संतुलन पर असर पड़ेगा। इसके नतीजे खतरनाक हो सकते हैं।”
— सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, सुनवाई के दौरान
UGC नियमों पर फैसले की 10 खास बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगाई।
- कोर्ट ने कहा, नियमों से सामाजिक ताना-बाना प्रभावित हो सकता है।
- याचिकाकर्ताओं ने नियमों को मनमाना बताया।
- UGC और केंद्र सरकार से लिखित जवाब मांगा गया।
- अगली सुनवाई तक नियम लागू नहीं होंगे।
- मामला उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता से जुड़ा है।
- देशभर के विश्वविद्यालयों में इस फैसले के बाद अस्थिरता थमी।
- छात्र संगठनों और शिक्षकों ने फैसले का स्वागत किया।
- कोर्ट ने कहा, नीति बनाते समय व्यापक असर देखना जरूरी है।
- फैसले से शिक्षा नीति पर नई बहस शुरू हुई।
आम छात्रों और विश्वविद्यालयों पर असर
इस रोक के बाद विश्वविद्यालयों में फिलहाल कोई तात्कालिक बदलाव नहीं होगा। प्रवेश प्रक्रिया, नियुक्तियों और शैक्षणिक ढांचे पर पहले की व्यवस्था ही लागू रहेगी। छात्रों को राहत मिली है, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन अब कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहा है।
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