- बड़ी गिरफ्तारी: EOW ने गृह-निर्माण सहकारी समिति के पूर्व अध्यक्ष थावरदास माधवानी और आवास पर्यवेक्षक बसंत साहू को जेल भेजा।
- फर्जीवाड़ा: आरोपियों ने 186 लोगों के फर्जी नाम पर हाउसिंग लोन पास कराकर करोड़ों का चूना लगाया।
- पुराना हिसाब: यह घोटाला 26 साल पुराना है, जिसमें अब जाकर बड़ी सफलता मिली है।
EOW Chhattisgarh Arrest , रायपुर — आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने रायपुर के बहुचर्चित हाउसिंग लोन घोटाले में 26 साल बाद निर्णायक प्रहार किया है। जांच एजेंसी ने 1.86 करोड़ रुपए के गबन मामले में सिंधी गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और एक सरकारी आवास पर्यवेक्षक को गिरफ्तार किया है। सालों से लटकी इस फाइल ने एक बार फिर रायपुर की प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
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186 फर्जी नामों का खेल: ऐसे हुआ करोड़ों का गबन
जांच में खुलासा हुआ कि थावरदास माधवानी और बसंत कुमार साहू ने मिलीभगत कर बैंक और सरकारी सिस्टम को अंधकार में रखा। इन लोगों ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर ऐसे 186 लोगों की लिस्ट तैयार की, जिनका वास्तविकता में कोई वजूद नहीं था या जिन्हें लोन की जानकारी तक नहीं थी।
- घोटाले की राशि: कुल 1,86,00,000 (1.86 करोड़) रुपए।
- मुख्य आरोपी: थावरदास माधवानी (तत्कालीन अध्यक्ष, सिंधी गृह निर्माण सहकारी समिति)।
- सह-आरोपी: बसंत कुमार साहू (तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक)।
- तरीका: फर्जी आवेदन और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए ऋण की निकासी।
“घोटाले के तार काफी गहरे थे। 26 साल पहले किए गए इस अपराध के सबूतों को कड़ी दर कड़ी जोड़ा गया। कानून से कोई बच नहीं सकता, चाहे समय कितना भी बीत जाए।”
— अधिकारी, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW)
EOW ने इन दोनों को कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग की है। यह गिरफ्तारी उन सफेदपोश अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है जो लंबे समय से कानूनी दांवपेच के पीछे छिपे थे। विभाग अब इस घोटाले से जुड़े अन्य छोटे मोहरों और बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रहा है।
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