मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच रही मूलभूत सुविधाएं
राजमन कश्यप
नारायणपुर/अबूझमाड़।(गंगा प्रकाश)। कभी नक्सल प्रभाव और भय के साये में जीने वाला मरकाबेड़ा गांव आज एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बन रहा है। अब यहां बंदूक की गूंज नहीं, बल्कि बच्चों की किलकारियां और शिक्षा की अलख सुनाई दे रही है। यह परिवर्तन राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम है।

कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में 100 किलोमीटर दूर बसे इस दुर्गम गांव में प्राथमिक शाला का शुभारंभ किया गया, जो क्षेत्र के बच्चों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। वर्षों से शिक्षा से वंचित रहे बच्चे अब स्कूल की दहलीज तक पहुंच रहे हैं और अपने उज्जवल भविष्य की ओर पहला कदम बढ़ा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मरकाबेड़ा जैसे दुर्गम क्षेत्र में विद्यालय की स्थापना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

शाला प्रवेश उत्सव के दौरान बच्चों को निःशुल्क गणवेश, पाठ्यपुस्तकें एवं पोषक आहार वितरित किए गए। इस अवसर पर बच्चों और उनके अभिभावकों में खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार के इस प्रयास के प्रति आभार व्यक्त किया।
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यह पहल न केवल शिक्षा के प्रसार की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अबूझमाड़ जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी विकास की किरणें पहुंच रही हैं। मरकाबेड़ा अब बदलाव की मिसाल बनकर उभर रहा है — जहां डर के माहौल से निकलकर बच्चे अब ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ रहे हैं।




