राधे पटेल
मैनपुर/गरियाबंद(गंगा प्रकाश)। जनता की समस्याओं और विकास योजनाओं पर खुलकर चर्चा करने के लिए आयोजित होने वाली जनपद पंचायत की सामान्य सभा इस बार खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है। मैनपुर जनपद पंचायत में आयोजित हालिया बैठक ने पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बंद कमरे में हुई बैठक, अधिकारियों की भारी अनुपस्थिति और आंगनबाड़ी नियुक्तियों को लेकर हुए विवाद ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि आखिर बैठक में विकास की रूपरेखा तय की जा रही थी या फिर किसी प्रकार की ‘सेटिंग’ को अंजाम दिया जा रहा था।

33 में से सिर्फ 7 अधिकारी पहुंचे, 26 विभाग गायब
जनपद पंचायत की इस महत्वपूर्ण सामान्य सभा में कुल 33 विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है, ताकि विभिन्न योजनाओं की समीक्षा और समन्वय बेहतर तरीके से हो सके। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि बैठक में महज 7 विभागों के अधिकारी ही उपस्थित रहे, जबकि 26 विभागों के जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह नदारद रहे। इस लापरवाही ने जनप्रतिनिधियों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया। सदस्यों का कहना था कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही बैठक में नहीं आएंगे, तो विकास योजनाओं की समीक्षा और क्रियान्वयन कैसे संभव होगा।
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आंगनबाड़ी नियुक्तियों पर गरमाया माहौल
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा हंगामा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका की नियुक्तियों को लेकर हुआ। जनपद सदस्यों ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर मनमानी तरीके से नियुक्तियां की जा रही हैं। इस मुद्दे पर सदस्यों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कई सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि नियुक्तियों में गड़बड़ी हुई तो वे आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

जनपद सदस्यों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
जनपद क्षेत्र क्रमांक 17 के सदस्य योगीराज माखन कश्यप ने अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीर लापरवाही बताते हुए कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरी बार सामान्य सभा की बैठक प्रभावित हुई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने गैरहाजिर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की। वहीं, क्षेत्र क्रमांक 11 के सदस्य परमेश्वर जैन ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
सीईओ का रहस्यमयी रवैया, मीडिया से दूरी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) डी.एस. नागवंशी के रवैये को लेकर हो रही है। आरोप है कि उनके निर्देश पर ही बैठक कक्ष का दरवाजा अंदर से बंद कराया गया, जिससे मीडिया और आम लोगों को अंदर जाने से रोक दिया गया। बैठक समाप्त होने के बाद जब पत्रकारों ने उनसे प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, तो उन्होंने बात करने से साफ इनकार कर दिया और बिना कुछ कहे कार्यालय से निकल गए। इस व्यवहार ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे सवाल
पंचायती राज व्यवस्था में जनपद पंचायत की सामान्य सभा एक महत्वपूर्ण मंच होता है, जहां विकास योजनाओं की समीक्षा, समस्याओं का समाधान और नई योजनाओं पर विचार-विमर्श किया जाता है। लेकिन जब ऐसी बैठकें बंद कमरे में हों और जिम्मेदार अधिकारी अनुपस्थित रहें, तो पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर ही सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सब कुछ नियमों के तहत हो रहा था, तो बैठक को खुला रखने में क्या दिक्कत थी?
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क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म, कार्रवाई की मांग तेज
घटना के बाद पूरे मैनपुर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं और प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में जांच नहीं हुई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
विकास पर असर पड़ने की आशंका
लगातार बैठकों का प्रभावित होना और अधिकारियों की उदासीनता सीधे तौर पर क्षेत्र के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है। अधूरी योजनाएं, लंबित कार्य और बढ़ती समस्याएं आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं। ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शिता सुनिश्चित करे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।




