एक शिक्षक के भरोसे चल रहा हाई स्कूल, बच्चों को साथ लेकर पहुंचे ग्रामीण और पालक; कलेक्टर को दिए आवेदन के बाद भी नहीं हुआ समाधान
संदीप कुमार अग्रवाल
पिथौरा (गंगा प्रकाश)। सात दिन पहले ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि शासकीय हाई स्कूल ढोढरकसा में शिक्षकों की कमी दूर नहीं की गई तो विद्यालय में तालाबंदी की जाएगी। सात दिन की यह समय-सीमा पूरी हुई तो शुक्रवार को ग्रामीण अपने बच्चों और पालकों के साथ स्कूल पहुंच गए। कुछ देर तक इंतजार और चर्चा के बाद विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया गया। अचानक हुई इस तालाबंदी से विद्यालय की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला पिथौरा विकासखंड के ग्राम ढोढरकसा स्थित शासकीय हाई स्कूल का है, जहां ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में विद्यालय की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। हाई स्कूल स्तर पर अलग-अलग विषयों की पढ़ाई और विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को देखते हुए पर्याप्त शिक्षकों की मांग लंबे समय से की जा रही है। ग्रामीणों और पालकों का आरोप है कि शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इस समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया।

कलेक्टर को दिया था आवेदन, मांगा था सात दिन का समय
शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों और पालकों ने महासमुंद कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर विद्यालय में आवश्यक शिक्षकों की व्यवस्था किए जाने की मांग की थी। आवेदन के माध्यम से प्रशासन को समस्या से अवगत कराते हुए ग्रामीणों ने सात दिनों के भीतर निराकरण की मांग रखी थी। साथ ही यह स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों को विद्यालय में तालाबंदी जैसा कदम उठाना पड़ेगा।
👉 जरूर पढ़ें:आठ साल से गोदाम में बंद टिफिन बॉक्स, मजदूरों की थाली अब भी खाली!
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रशासन समय-सीमा के भीतर विद्यालय की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शिक्षकों की व्यवस्था करेगा। लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ गई।
समय-सीमा पूरी हुई तो बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे ग्रामीण
शुक्रवार को निर्धारित सात दिन की समय-सीमा पूरी होने के बाद ग्रामीण और पालक अपने बच्चों के साथ शासकीय हाई स्कूल ढोढरकसा पहुंचे। ग्रामीणों ने विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जताई और तत्काल शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की। इसके बाद विद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया।
तालाबंदी के दौरान ग्रामीणों का कहना था कि वे बच्चों की पढ़ाई रोकने के पक्ष में नहीं हैं। उनकी मांग तो यह है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। ग्रामीणों के अनुसार यदि विद्यालय में केवल एक शिक्षक के भरोसे शैक्षणिक व्यवस्था संचालित होती रही तो विद्यार्थियों को प्रत्येक विषय की नियमित पढ़ाई का लाभ मिलना मुश्किल होगा।

‘हमारे बच्चों की पढ़ाई का सवाल है’
पालकों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के परिवार अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा। पालकों ने सवाल उठाया कि हाई स्कूल की कक्षाओं में अलग-अलग विषयों की पढ़ाई किस प्रकार प्रभावी ढंग से संचालित होगी, जब विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं।
👉 जरूर पढ़ें: कंधों पर यूरिया की बोरी… आगे-आगे बज रहे थे ढोल! आखिर गांव में ऐसा क्या हुआ?
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी व्यक्तिगत लाभ से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय में तत्काल आवश्यक शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से शुरू हो सके।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
ग्रामीणों की तालाबंदी के बाद अब सबकी नजर प्रशासन की ओर है। सात दिन की समय-सीमा दिए जाने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने के बाद ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज करा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन जल्द से जल्द विद्यालय में शिक्षकों की व्यवस्था करता है तो वे विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए विद्यालय की व्यवस्था सामान्य करने के लिए तैयार हैं।
फिलहाल ढोढरकसा हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा ग्रामीणों के विरोध के बाद चर्चा में आ गया है। सवाल यह है कि एक शिक्षक के भरोसे चल रहे विद्यालय में कब तक पूरी शैक्षणिक व्यवस्था संचालित होगी और विद्यार्थियों को विषयवार पर्याप्त शिक्षक कब मिलेंगे? ग्रामीणों और पालकों को अब प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई का इंतजार है।





