नई दिल्ली/रायपुर (गंगा प्रकाश)। 27.894 किलोग्राम गांजा बरामदगी से जुड़े एनडीपीएस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ निवासी आरोपी मोहन सिंह कोशले उर्फ राकेश को जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की दो सदस्यीय पीठ ने 18 सितंबर 2026 को आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए आरोपी को संबंधित सेशंस कोर्ट की शर्तों के अधीन रिहा करने का निर्देश दिया।
यह मामला मोहन सिंह कोशले और राकेशबनाम छत्तीसगढ़ राज्य से संबंधित है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता देव प्रसाद जोशी ने अपने साथी अधिवक्ताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की।

घर के पास पकड़ा, तलाशी में नहीं मिला गांजा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अभियोजन का आरोप था कि 20 मई 2025 को आरोपी को उसके घर के पास पकड़ा गया था। पुलिस द्वारा ली गई व्यक्तिगत तलाशी के दौरान उसके पास से कोई प्रतिबंधित मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। इसके बाद आरोपी के घर से लगी भाठा भूमि में स्थित एक गड्ढे से दो बोरियों में कुल 27.894 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने का दावा किया गया।
इसी बरामदगी के आधार पर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
कथित मेमोरेण्डम कथन भी बना आधार
अभियोजन की ओर से आरोपी के कथित मेमोरेण्डम/कथन को भी आधार बनाया गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर बताया था कि फरार सह-आरोपी राकेश वर्मा ने उसे गांजा रखने के लिए दिया था और बरामद गांजे को सुरक्षित रखने के एवज में उसे रकम दिए जाने की बात कही गई थी।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बरामदगी के स्थान, आरोपी के कब्जे और कथित मादक पदार्थ से उसके संबंध सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया।

19 में से 10 गवाहों के बयान, चार हुए शत्रुतापूर्ण
अदालत के आदेश में दर्ज है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और ट्रायल शुरू हो गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन के 19 में से 10 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। इनमें चार गवाह, जिनमें एक पंच गवाह भी शामिल था, अभियोजन के समर्थन में नहीं रहे और शत्रुतापूर्ण हो गए।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के प्रश्न पर विचार करते समय इस परिस्थिति को भी रिकॉर्ड में लिया।
जान-बूझकर कब्ज़ा पर अंतिम फैसला ट्रायल में
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से इस तथ्य पर ध्यान दिया कि कथित गांजा आरोपी की व्यक्तिगत तलाशी से बरामद नहीं हुआ था। अदालत ने यह प्रश्न भी विचारणीय माना कि जिस स्थान से गांजा बरामद किया गया, क्या वह आरोपी के विशेष या एकमात्र कब्जे में था और क्या आरोपी उस मादक पदार्थ के ‘जान-बूझकर कब्ज़ा’ में था।
पीठ ने स्पष्ट किया कि इन सवालों का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कठोर जमानत शर्तें लागू होती हैं अथवा नहीं, यह प्रश्न भी विचारण के स्तर पर परीक्षण का विषय बताया गया।
जमानत मिली, आरोपों से दोषमुक्ति नहीं
इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर आरोपी को जमानत का हकदार माना। अदालत ने पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए आरोपी को संबंधित ज्यूरिडिक्शनल सेशंस कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों एवं नियमों के अधीन रिहा करने का निर्देश दिया।
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अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जमानत का आदेश आरोपी को मामले के आरोपों से दोषमुक्त नहीं करता है। बरामदगी वाले स्थान पर आरोपी का कब्जा, मादक पदार्थ पर नियंत्रण तथा ‘जान-बूझकर कब्ज़ा’ जैसे मुद्दों पर अंतिम निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
आरोपी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अविनाश दुबे, हरि अभिषेक पी.देव प्रसाद जोशी तथा एओआर सोमनाथ पाढ़न उपस्थित रहे। राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल ऋषभ साहू सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।

प्रकरण: आपराधिक अपील संख्या 4440/2026, और एसएलपी (आपराधिक) संख्या 17846/2026
आदेश दिनांक: 18 सितंबर 2026
पीठ: न्यायमूर्ति अरविंद कुमार एवं न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली
मामला: मोहन सिंह कोशले और राकेश बनाम छत्तीसगढ़ राज्य




