पीएम श्री अकलवारा स्कूल में बिल-वाउचर गड़बड़ी की शिकायत पर जांच दल गठित
प्रकाशित खबर के बाद उच्च कार्यालय के निर्देश पर बीईओ ने बनाई जांच टीम, सामग्री खरीदी, पेंटिंग, वाहन किराया और खाद्य सामग्री के भुगतान होंगे जांच के दायरे में
छुरा (गंगा प्रकाश)। विकासखंड छुरा के ग्राम अकलवारा स्थित पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी एवं भुगतान से जुड़े बिल-वाउचर को लेकर प्रकाशित खबर के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है। मामले को लेकर उच्च कार्यालय के निर्देश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने जांच दल गठित किया है। अब जांच टीम विद्यालय में वर्ष 2024 के दौरान किए गए विभिन्न भुगतानों और खरीदी से संबंधित दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभिलेखों में दर्ज खर्च वास्तविक कार्य एवं सामग्री से जुड़े हैं या नहीं।
मामले में मिट्टी, सीमेंट, बिरला व्हाइट, प्लास्टिक एवं रबर पेंट सहित विभिन्न सामग्रियों की खरीदी के बिल सामने आने की बात कही जा रही है। वहीं टूर-ट्रैवल के नाम पर आर्टिका वाहन का प्रति किलोमीटर 52 रुपये की दर से भुगतान किए जाने का दावा भी दस्तावेजों के आधार पर किया गया है। शौचालय की पोताई के लिए छह हजार रुपये तथा करीब एक हजार वर्गफीट दीवार पर चित्रकारी के लिए लगभग 40 हजार रुपये खर्च किए जाने की जानकारी भी जांच के दायरे में है।

15 ट्रैक्टर मिट्टी, 25 बैग सीमेंट… लेकिन उपयोग कहां?
शिकायत में 15 ट्रैक्टर मिट्टी की ढुलाई और 25 बैग सीमेंट की खरीदी का उल्लेख होने की बात सामने आई है। अब जांच का अहम बिंदु यही रहेगा कि इतनी मात्रा में खरीदी गई सामग्री विद्यालय परिसर में किस कार्य में इस्तेमाल हुई। सीमेंट खरीदी के साथ परिवहन संबंधी बिल-वाउचर उपलब्ध होने या नहीं होने की बात भी उठाई गई है।
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जांच दल यदि मूल बिल, भुगतान रिकॉर्ड, सामग्री प्राप्ति संबंधी दस्तावेज और मौके पर हुए कार्य का मिलान करता है तो इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
पेंटिंग के भुगतान ने भी बढ़ाई उत्सुकता
विद्यालय भवन और शौचालय की पेंटिंग पर हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। करीब एक हजार वर्गफीट दीवार की चित्रकारी के लिए लगभग 40 हजार रुपये तथा शौचालय की पोताई के लिए छह हजार रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अब जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि पेंटिंग का वास्तविक क्षेत्रफल कितना था, कितनी सामग्री खरीदी गई और संबंधित कार्य के लिए भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया।

70 रुपये किलो चावल और खाद्य सामग्री के बिल
खाद्य सामग्री की खरीदी के बिलों को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं। शिकायत के अनुसार दस्तावेजों में 70 रुपये प्रति किलो की दर से चावल, 20 किलो प्याज, तीन किलो लहसुन, 20 किलो दाल और 30 किलो आलू की खरीदी दर्शाए जाने की जानकारी है।
साथ ही भोजन तैयार करने के लिए मजदूरी, लकड़ी अथवा गैस पर खर्च का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने का दावा किया गया है। प्राथमिक स्कूल के बच्चों के लिए करीब 25 हजार रुपये के कपड़े तथा फावड़ा, गैती जैसे औजारों की खरीदी का उल्लेख भी सामने आया है।
मुड़ागांव में नाश्ता मिलता है, फिर 25 किलोमीटर दूर से क्यों?
मामले में सबसे अधिक चर्चा नाश्ता खरीदी और वाहन किराये से जुड़े दावे को लेकर है। अकलवारा से करीब दो किलोमीटर दूर मुड़ागांव में होटल में ताजा समोसा, कचौरी और बालूशाही उपलब्ध होने के बावजूद फिंगेश्वर नगर से करीब 25 किलोमीटर दूर से नाश्ता लाने का भुगतान दर्शाए जाने की बात सामने आई है।
दस्तावेजों के अनुसार सौ-सौ नग समोसा, कचौरी और बालूशाही सहित करीब सौ लोगों के नाश्ते का उल्लेख बताया जा रहा है। इसके लिए लगभग 50 किलोमीटर वाहन आवागमन का भुगतान किए जाने की बात भी सामने आई है।
बेसन, तेल, शक्कर, खोपरा, काजू और किशमिश जैसी सामग्री की खरीदी एवं उपयोग को लेकर भी अब जांच में स्पष्टता आने की उम्मीद है। जांच टीम के सामने यह सवाल भी रहेगा कि संबंधित खाद्य सामग्री वास्तव में कहां और किस कार्यक्रम में उपयोग की गई।
बिलों के प्रिंटिंग पैटर्न पर भी सवाल
कुम्हार, नृत्य सिखाने वाले, बढ़ई और संगीतकार के नाम से प्रस्तुत किए गए बिलों के प्रिंटिंग पैटर्न को लेकर भी संदेह व्यक्त किया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच में संबंधित व्यक्तियों के बयान, मूल बिल, भुगतान रिकॉर्ड और कार्य से जुड़े प्रमाणों का परीक्षण किए जाने के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।
जांच की निष्पक्षता बनी सबसे बड़ा सवाल
गंगा प्रकाश वेब पोर्टल और समाचार पत्र में खबर प्रकाशित होने के बाद जांच दल गठित कर दिया गया है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी गहराई से होती है। शिकायत से जुड़े लोगों की मांग है कि केवल बिलों की औपचारिक जांच के बजाय सामग्री की वास्तविक प्राप्ति, उपयोगिता, कार्य की स्वीकृति, भुगतान प्रक्रिया, मूल दस्तावेज और मौके पर किए गए कार्य का भौतिक सत्यापन भी किया जाए।
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वहीं प्रधान पाठक टिकम साहू ने अनौपचारिक बातचीत में कथित रूप से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कमीशन दिए जाने की बात कही है। इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच के दौरान इस संबंध में कोई तथ्य सामने आता है तो संबंधित दस्तावेजों और पक्षकारों के बयान के आधार पर इसकी पुष्टि किया जाना आवश्यक होगा।
अब जांच रिपोर्ट खोलेगी राज
फिलहाल जांच दल के गठन के बाद पूरे मामले की अगली तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि विद्यालय के अभिलेखों में दर्ज खरीदी वास्तव में हुई थी या नहीं, सामग्री का उपयोग निर्धारित कार्य में हुआ या नहीं, भुगतान नियमों के अनुरूप किए गए अथवा नहीं और प्रस्तुत बिल-वाउचर मूल एवं प्रमाणित हैं या नहीं।
अब सवाल सिर्फ बिलों का नहीं, बल्कि उन बिलों के पीछे हुए वास्तविक काम का है। जांच टीम दस्तावेजों से लेकर मौके तक पहुंचती है या जांच केवल कागजों तक सीमित रहती है—इसी पर पीएम श्री अकलवारा विद्यालय के इस पूरे मामले का अगला अध्याय निर्भर करेगा।





