जसगीतों और जयकारों के बीच मां दुर्गा को भावभीनी विदाई, छिंद तालाब में हुआ प्रतिमाओं का सांकेतिक विसर्जन; अगले बरस फिर आने की कामना के साथ संपन्न हुआ शारदीय नवरात्रि पर्व
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। शक्ति की आराधना, अटूट आस्था और छत्तीसगढ़ी लोकपरंपराओं के रंग में रंगा शारदीय नवरात्रि पर्व मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर भावुक विदाई के साथ संपन्न हुआ। नौ दिनों तक मां दुर्गा की भक्ति में डूबे गरियाबंद नगर में प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान कहीं जसगीतों की मधुर धुन सुनाई दी, तो कहीं माता के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। उत्सव और उल्लास के बीच विदाई की घड़ी आई तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भक्तों ने मां दुर्गा को विदाई देते हुए परिवार, समाज और पूरे क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं शांति की कामना की। साथ ही अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की उम्मीद के साथ भावपूर्ण विदाई दी।
जसगीतों की धुन पर निकलीं विसर्जन यात्राएं, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
विजयादशमी की सुबह से ही गरियाबंद नगर के विभिन्न दुर्गा पंडालों में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। पूजा-अर्चना और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बाद दुर्गा उत्सव समितियों के सदस्य एवं श्रद्धालु मां की प्रतिमाओं को लेकर विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। जसगीतों, भजनों और बाजे-गाजे के बीच निकली यात्राओं ने नगर के प्रमुख मार्गों को भक्तिमय बना दिया।
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नगर के चौक-चौराहों से होकर गुजरती विसर्जन यात्राओं के दौरान श्रद्धालु मां के जयकारे लगाते नजर आए। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग माता के अंतिम दर्शन के लिए एकत्रित हुए। किसी ने हाथ जोड़कर मां का आशीर्वाद मांगा, तो किसी ने परिवार की खुशहाली और जीवन में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और विदाई की भावुकता का अनूठा संगम दिखाई दिया।

छिंद तालाब में प्रतिमाओं का सांकेतिक विसर्जन
नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं को विदाई देने के लिए श्रद्धालु छिंद तालाब पहुंचे, जहां प्रतिमाओं का सांकेतिक विसर्जन किया गया। इस दौरान मां दुर्गा के जयकारों के साथ भक्तों ने अगले वर्ष फिर से माता के आगमन की कामना की। नवरात्रि के दौरान पंडालों में नियमित रूप से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह पल भावुक करने वाला रहा।
मां की प्रतिमा के सामने शीश झुकाकर भक्तों ने सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की। विदाई की इस बेला में श्रद्धालुओं के मन में एक ओर नौ दिनों तक चले उत्सव की यादें थीं, तो दूसरी ओर अगले वर्ष फिर से मां दुर्गा की आराधना करने की प्रतीक्षा भी दिखाई दी।
इन पंडालों में नौ दिनों तक रही रौनक
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गरियाबंद नगर के बजरंग चौक, यादव पारा, सुभाष चौक, शिक्षक नगर, सिविल लाइन और संतोषी मंदिर गांधी मैदान सहित विभिन्न स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। इन पंडालों में नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना, जसगीत, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
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सुबह से देर शाम तक पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। माता के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और पूरे नवरात्रि नगर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। विभिन्न दुर्गा उत्सव समितियों की सक्रियता से पर्व की रौनक और भी बढ़ गई।

गरबा आयोजन ने बढ़ाई सांस्कृतिक छटा
नवरात्रि के दौरान गुजराती समाज द्वारा आयोजित गरबा कार्यक्रम ने भी नगर के उत्सवी माहौल में चार चांद लगाए। पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंस्कृति और भक्ति से जुड़े आयोजनों में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गरबा के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकता की झलक भी देखने को मिली।
नवरात्रि का पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विभिन्न समाजों और वर्गों के लोगों को एक साथ जोड़ने का अवसर भी प्रदान किया। नौ दिनों तक नगर में बनी रौनक ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को जीवंत बनाए रखा।
अब अगले बरस फिर आएंगी मां… इसी उम्मीद के साथ विदाई
विजयादशमी के साथ ही गरियाबंद में नौ दिनों से जारी शारदीय नवरात्रि उत्सव का समापन हो गया। पंडालों में गूंजने वाले जसगीतों और जयकारों की आवाजें भले ही थम गईं, लेकिन मां के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति उनके मन में बनी हुई है।
मां दुर्गा को विदाई देते हुए भक्तों ने प्रार्थना की कि माता का आशीर्वाद सभी पर बना रहे, हर घर में सुख-शांति और समृद्धि आए तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और खुशहाली कायम रहे। प्रतिमाओं की विदाई के साथ ही श्रद्धालुओं के मन में अगले वर्ष मां दुर्गा के आगमन की प्रतीक्षा शुरू हो गई। इसी विश्वास और भावपूर्ण कामना के साथ नगरवासियों ने मां से कहा—मां, अगले बरस फिर आना।





