दो दिवसीय रामलीला महोत्सव में सीताहरण से रावण वध तक हुआ भव्य मंचन, ग्राम लोहझर और खट्टी के ग्रामीणों के सहयोग से साकार हुआ आयोजन; शिक्षक परिवार का विशेष योगदान
छुरा(गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, धार्मिक आस्था और पारंपरिक नाट्य कला की अनूठी मिसाल ग्राम लोहझर में देखने को मिली, जहां प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी दो दिवसीय रामलीला महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। लगभग 85 वर्षों से चली आ रही रामलीला मंचन की परंपरा ने एक बार फिर क्षेत्रवासियों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म और सत्य की विजय का संदेश दिया। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि ग्राम के युवाओं ने अपनी कला और समर्पण से रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। रामलीला देखने के लिए ग्राम लोहझर सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी।
ग्रामीणों के सहयोग से तैयार हुआ भव्य मंच
ग्राम लोहझर का रामलीला मंचन गरियाबंद जिले के बड़े रामलीला मंचों में से एक माना जाता है। इस वर्ष आयोजन को और भी आकर्षक एवं भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए ग्राम लोहझर एवं खट्टी के ग्रामीणों के सहयोग से भव्य मंच का निर्माण कराया गया। आयोजन को सफल बनाने के लिए गांव के लोगों ने आर्थिक सहयोग देकर अपनी सहभागिता निभाई। विशेष रूप से शिक्षक परिवार लोहझर द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की गई।
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ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से तैयार हुआ यह मंच केवल धार्मिक आयोजन का केंद्र नहीं, बल्कि गांव की एकता, सांस्कृतिक विरासत और आपसी सहयोग का प्रतीक भी बना। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाने में स्थानीय युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

सीताहरण से विभीषण की शरणागति तक दिखे रामायण के प्रसंग
दो दिवसीय रामलीला महोत्सव के प्रथम दिवस भगवान श्रीराम की कथा के महत्वपूर्ण प्रसंगों का मंचन किया गया। इसमें माता सीता के हरण से लेकर विभीषण की शरणागति तक की घटनाओं को प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से रामायण के विभिन्न पात्रों की भावनाओं और घटनाक्रम को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।
वहीं अंतिम दिवस अंगद-रावण संवाद से लेकर रावण वध तक का मंचन किया गया। अंगद और रावण के बीच संवाद, युद्ध की परिस्थितियां तथा अंत में रावण वध के प्रसंग ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। रामलीला के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। पूरे आयोजन के दौरान दर्शकों में उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल बना रहा।
85 वर्षों से युवाओं के कंधों पर कायम है परंपरा
ग्राम लोहझर में लगभग 85 वर्षों से रामलीला का मंचन स्थानीय युवाओं द्वारा किया जा रहा है। समय के साथ इस परंपरा ने ग्रामीण संस्कृति में अपनी विशेष पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों के बावजूद ग्रामीणों की सहभागिता और कलाकारों की मेहनत ने इस आयोजन को निरंतर जीवंत बनाए रखा है।
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आज के दौर में जहां पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण की आवश्यकता महसूस की जा रही है, वहीं लोहझर के ग्रामीणों द्वारा पीढ़ियों से रामलीला का आयोजन करना सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की प्रेरक मिसाल है। इस आयोजन ने यह भी दर्शाया कि सामूहिक इच्छाशक्ति और सहयोग से गांव में बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों को सफल बनाया जा सकता है।

अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाया आयोजन का गौरव
रामलीला महोत्सव में अतिथि के रूप में फलेन्द्र ठाकुर गौटिया, यशवंत ठाकुर सरपंच, मनीराम ध्रुव पंच, खम्मन ठाकुर पंच एवं ओंकार ठाकुर उपस्थित रहे। अतिथियों की उपस्थिति से आयोजन की गरिमा बढ़ी। ग्रामीणों और दर्शकों ने उत्साहपूर्वक रामलीला का आनंद लिया।
आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा सराहनीय योगदान
रामलीला मंचन परिवार के आयोजकों, पाठकों एवं सहयोगियों में खगेश्वर साहू, राम पटेल, चम्मन पटेल, बिसाहू निषाद, पवन ध्रुव (शिक्षक), भूपेश यदु, जगदीश साहू, युवराज पटेल, चोवा निषाद, राजेश यदु, लुनेश साहू, अरुण ठाकुर, मनोहर, श्यामलाल, ललित गोमेश्वर, देवनारायण साहू, कान्हा यादव, धन्नू चक्रधारी, नितिन, उमेश साहू, सागर, शोभा, रोहन, लुकेश साहू, उमेश्वर साहू एवं गणेश सहित सभी पाठकों और सहयोगियों का सराहनीय योगदान रहा।
ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग, कलाकारों की मेहनत और आयोजन समिति के समर्पण से दो दिवसीय रामलीला महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। लोहझर की यह 85 वर्ष पुरानी परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ ग्रामीण एकता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश देती है।





