घनी आबादी और व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकान लगाने की अनुमति नहीं, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
अग्निशमन यंत्र, पानी के ड्रम और आपातकालीन व्यवस्था रखना अनिवार्य, दुकानों के बीच तीन मीटर की दूरी जरूरी
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। रोशनी, खुशियों और आतिशबाजी के इस त्योहार में पटाखों की खरीदारी को लेकर भी लोगों में उत्साह रहता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में पटाखा दुकानों के संचालन और आतिशबाजी के सुरक्षित भंडारण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने पटाखा दुकानों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। नियमों की अनदेखी कर दुकान संचालित करने और अवैध रूप से पटाखों का भंडारण करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
👉 जरूर पढ़ें : भसेरा के मेडिकल स्टोर में औषधि विभाग की दबिश, दो दवाओं के सैंपल से मचा हड़कंप
पिछले कुछ वर्षों में पटाखा दुकानों एवं भंडारण स्थलों पर आगजनी की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। निर्देशों के अनुसार पटाखा दुकानें स्थानीय प्रशासन द्वारा चयनित एवं आबंटित स्थलों पर ही निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित की जा सकेंगी। घनी आबादी वाले इलाकों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पटाखा दुकानें लगाने की अनुमति नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर दुकान स्थल की सुरक्षा के संबंध में जिला अग्निशमन अधिकारी से अभिमत भी लिया जा सकता है, ताकि संभावित जोखिमों का आकलन किया जा सके।

दुकानों के निर्माण में भी सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। पटाखा दुकानें कपड़े, बांस, रस्सी, टेंट या अन्य ज्वलनशील सामग्री से नहीं बनाई जा सकेंगी। दुकानें अज्वलनशील सामग्री से बने टिन शेड में संचालित होनी चाहिए। प्रत्येक दुकान के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखना जरूरी होगा। इसके साथ ही दुकानें एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं बनाई जाएंगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में एक दुकान से दूसरी दुकान तक आग फैलने की आशंका को कम करना है।
प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। दुकानों में तेल के लैंप, गैस लैंप और खुली बिजली बत्ती का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। विद्युत व्यवस्था में तारों के जोड़ खुले नहीं होने चाहिए। प्रत्येक मास्टर स्विच में फ्यूज अथवा सर्किट ब्रेकर लगाना अनिवार्य होगा, ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी स्थिति में बिजली आपूर्ति बंद हो सके। पटाखा दुकानें ट्रांसफार्मर के पास नहीं होनी चाहिए और दुकानों के ऊपर से हाईटेंशन बिजली लाइन नहीं गुजरनी चाहिए। इसके अतिरिक्त पटाखा दुकानों से 50 मीटर के दायरे में आतिशबाजी का प्रदर्शन भी प्रतिबंधित रहेगा।

आग बुझाने के लिए पहले से रखनी होगी व्यवस्था
सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक पटाखा दुकान में पांच किलोग्राम क्षमता का डीसीपी अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य होगा। केवल अग्निशामक यंत्र रख देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि आपात स्थिति में उसका उपयोग करने की तैयारी भी जरूरी है। इसके अलावा दुकानों के सामने उचित अंतराल पर 500 लीटर क्षमता के पानी से भरे ड्रम और बाल्टियों की व्यवस्था रखनी होगी, ताकि आगजनी की स्थिति में शुरुआती स्तर पर बचाव के उपाय किए जा सकें।
👉 जरूर पढ़ें : पसौद के तालाब में आखिर क्या हुआ? रेस्क्यू से पहले ही थम गई 50 वर्षीय ग्रामीण की सांसें
दुकानों के सामने बाइक और कार की पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी। पटाखा दुकान परिसर में प्रमुख स्थानों पर अग्निशमन विभाग और एम्बुलेंस के संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने होंगे। किसी भी आपातकालीन स्थिति में दमकल वाहन तत्काल मौके तक पहुंच सकें, इसके लिए पर्याप्त रास्ता खुला रखना भी अनिवार्य होगा। दुकानों के आसपास अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था से बचना भी सुरक्षा प्रबंधन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
अवैध भंडारण पर भी रहेगी सख्ती
पटाखों की बिक्री के साथ-साथ उनके सुरक्षित भंडारण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। बिना निर्धारित अनुमति अथवा नियमों के विपरीत संचालित पटाखा दुकानों और भंडारण स्थलों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कारोबारियों को निर्धारित स्थल, सुरक्षा व्यवस्था और लागू अनुमति संबंधी शर्तों का पालन करना होगा। वहीं, किसी भी संभावित आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक रहेगा।
दीपावली खुशियों और उत्साह का पर्व है, लेकिन आतिशबाजी से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुरक्षा मानकों का पालन केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दुकानदारों, ग्राहकों और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। ऐसे में पटाखा कारोबारियों की जिम्मेदारी है कि वे नियमों के अनुरूप ही दुकान संचालित करें, ताकि त्योहार के दौरान किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके और दीपावली सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण वातावरण में मनाई जा सके।





