खेल मैदान में 15 से अधिक दुकानें संचालित, नगर के वार्डों और ग्रामीण बाजारों में भी पटाखों की बिक्री का आरोप; सुरक्षा मानकों की जांच की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। दीपावली के त्योहार को देखते हुए छुरा नगर में इस वर्ष पटाखा बाजार खेल मैदान में लगाया गया है। प्रशासन की ओर से निर्धारित स्थल पर पटाखा दुकानें संचालित की जा रही हैं, लेकिन इस व्यवस्था के बीच लाइसेंस और दुकान संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार खेल मैदान में 15 से अधिक पटाखा दुकानें संचालित हो रही हैं। आरोप है कि इनमें कुछ व्यापारियों के पास स्वयं का लाइसेंस नहीं है, बल्कि वे दूसरे लाइसेंसधारियों से किराये पर लाइसेंस लेकर पटाखों का कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पटाखा बिक्री का लाइसेंस किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर जारी किया गया है, तो क्या उसके स्थान पर दूसरा व्यक्ति दुकान संचालित कर सकता है? क्या विस्फोटक पदार्थों के कारोबार में लाइसेंस को किराये पर देना अथवा दूसरे व्यक्ति द्वारा उसका उपयोग करना कानूनी रूप से मान्य है? यदि इसकी अनुमति नहीं है, तो संबंधित विभाग द्वारा ऐसे मामलों की जांच क्यों नहीं की जा रही है? पटाखों का कारोबार सामान्य व्यापार नहीं है, बल्कि इसमें आगजनी, विस्फोट और जनहानि का खतरा बना रहता है। ऐसे में लाइसेंसधारी व्यक्ति, निर्धारित बिक्री स्थल और सुरक्षा शर्तों का पालन बेहद महत्वपूर्ण है।
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इसी बीच नगर के कुछ वार्डों में भी पटाखा दुकानें संचालित होने की जानकारी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि कुछ व्यापारी नगर के वार्डों में पटाखों की दुकानें संचालित कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन दुकानों को भी सक्षम प्राधिकारी से विधिवत अस्थायी लाइसेंस जारी किया गया है? यदि अनुमति दी गई है तो किस आधार पर, किस स्थान के लिए और किन सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर दी गई है? क्या आवासीय एवं भीड़भाड़ वाले इलाकों में पटाखों की दुकान लगाने से पहले संबंधित विभाग ने स्थल का निरीक्षण किया है?

गांवों के बाजारों में भी बेधड़क पटाखा कारोबार, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
मामला केवल छुरा नगर तक सीमित नहीं है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पटाखा कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार विभिन्न ग्रामों के साप्ताहिक बाजारों और गांवों के बीच कुछ पटाखा व्यापारी बेधड़क दुकानें संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर बाजार की भीड़ और रिहायशी इलाकों के बीच पटाखों की बिक्री की जा रही है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित दुकानदारों के पास वैध लाइसेंस है या नहीं और उन्हें किस विभाग से बिक्री की अनुमति मिली है।
गांवों के बाजारों में जहां एक ओर सब्जी, किराना और अन्य सामान की दुकानें लगती हैं, वहीं दूसरी ओर पटाखों का भंडारण एवं विक्रय किया जाना आगजनी की आशंका को बढ़ा सकता है। यदि किसी दुकान में आग लगने जैसी घटना होती है, तो आसपास की दुकानों और बाजार में मौजूद लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में ग्रामीण बाजारों में संचालित पटाखा दुकानों की जांच और सुरक्षा इंतजामों का सत्यापन आवश्यक है।

विस्फोटक नियम 2008 में क्या हैं प्रावधान?
भारत सरकार के विस्फोटक नियम, 2008 के तहत पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए निर्धारित लाइसेंस अनिवार्य है। नियम 7 के अनुसार बिना अधिकृत लाइसेंस के विस्फोटक पदार्थों का विक्रय या बिक्री के उद्देश्य से भंडारण नहीं किया जा सकता। नियम 84 के तहत दीपावली जैसे त्योहारों पर निर्धारित शर्तों के साथ अस्थायी पटाखा दुकान के लिए लाइसेंस जारी किया जा सकता है। अस्थायी दुकानों के बीच कम से कम 3 मीटर की दूरी तथा संरक्षित स्थलों से कम से कम 50 मीटर की दूरी रखने का प्रावधान है। नियम 88 के अनुसार पटाखों की बिक्री लाइसेंस में निर्धारित परिसर से ही की जानी चाहिए। लाइसेंस की शर्तों और हस्तांतरण संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन भी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
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ऐसे में केवल किसी दूसरे लाइसेंसधारी का नाम लेकर पटाखा कारोबार संचालित करना अपने आप में वैध अनुमति नहीं माना जा सकता। प्रत्येक दुकान के लाइसेंस, निर्धारित स्थान, लाइसेंसधारी की भूमिका और संबंधित विभाग की स्वीकृति की जांच आवश्यक है।

प्रशासन से उठ रहे हैं ये अहम सवाल
छुरा नगर के खेल मैदान में संचालित सभी पटाखा दुकानों के लाइसेंस किसके नाम पर जारी किए गए हैं? क्या प्रत्येक दुकान संचालक के पास स्वयं का वैध लाइसेंस है? यदि किसी दूसरे व्यक्ति के लाइसेंस पर दुकान संचालित हो रही है, तो क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की लिखित स्वीकृति ली गई है? नगर के वार्डों और ग्रामीण बाजारों में पटाखा दुकानें संचालित करने की अनुमति किसने दी है? क्या इन सभी दुकानों का भौतिक निरीक्षण कर अग्निशमन व्यवस्था, विद्युत सुरक्षा, निर्धारित दूरी और आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों की जांच की गई है?
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन, नगर पंचायत, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग और संबंधित विस्फोटक प्राधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। यदि कहीं नियमों के विपरीत पटाखों का भंडारण या विक्रय किया जा रहा है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि छुरा नगर से लेकर ग्रामीण बाजारों तक पटाखों का कारोबार आखिर किन नियमों और अनुमतियों के आधार पर संचालित हो रहा है? क्या प्रशासन सभी दुकानों के लाइसेंस सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करेगा, या किसी अप्रिय घटना के बाद ही जिम्मेदार विभाग जागेंगे?





