भोपालपटनम (गंगा प्रकाश)। जिले के अंतिम छोर से रेत के आड़ में बेशकीमती वृक्षों की धड़ल्ले से तस्करी किया जा रहा है। जिस विषय को लेकर भोपालपटनम के भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष वेंकटेश्वर यालम ने प्रेस वार्ता करते हुए कहा है कि।वर्तमान में पड़ोसी राज्य ने रेत से भरा ट्रक को पकड़ा जिसमें अवैध रूप से बेशकीमती लट्ठों को जप्त कर बड़ी कार्रवाई करते हुए सफलता हासिल किया ।लेकिन हमारे राज्य के वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी को जंगल से कोई मतलब नहीं या ये कहे इनकी मिलीभगत से यह अवैध तस्करी का कार्य इनके ही निगरानी में संचालित तो नहीं?
बीजापुर जिले के तहसील भोपालपटनम के अंतिम छोर ग्राम पंचायत- तारलागुड़ा में नदी से रेत निकालकर पड़ोसी राज्य में ले जाया जा रहा है। इसी दरमियान कुछ दिन पहले पड़ोसी तेलंगाना राज्य के मूलगू जिले के वाजेडु मंडल के वन परिक्षेत्र अधिकारी को मुखबिर से सूचना मिली की रेत से भरा 14 चक्का ट्रक के अंदर सागौन लठ्ठा स्लीपर पारा कड़ी बड़ी मात्रा में बेशकीमती वृक्षों की अवैध तस्करी किया जा रहा है। वन परिक्षेत्र आधिकारी राजमौली ने दलबल के साथ तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के सीमा पर दबिश दी और जब ट्रक से रेत को थोड़ा खाली करने पर रेत के नीचे सागौन लट्ठों, कढ़ी और फारा पाया गया। जैसे ही ट्रक को पकड़ा वैसे ही मौके से चालक फरार हो गया। राजमौली ने कहा कि ” रेत के आड़ में अवैध सागौन लट्ठों की तस्करी बहुत दिनों से चल रहा है। मुखबिर से पुख्ता जानकारी मिलने के बाद ही दोनो राज्यों की सीमा रेखा के पास लोटापोटीगंडी पुलिया के पास दबिश देकर पकड़ा है। यह सागौन छत्तीसगढ़ राज्य का है। माल जप्त कर ट्रक को राजसात करने की प्रक्रिया की गई है।
पड़ोसी राज्य में छत्तीसगढ़ का सागौन पकड़ा गया है। किन्तु हमारे जिले के अधिकारी और कर्मचारी नींद से कब जागेंगें । इधर पूरा का पूरा जंगल साफ हो रहा है और कर्मचारी और आधिकारी को इससे कोई मतलब नहीं। कही ऐसा तो नहीं कि इन तस्करों के साथ इनकी मिलीभगत है?सूत्रों से पता चला है कि भोपालपटनम वन परिक्षेत्र के अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह से मौखिक वार्ता की तो उन्होने कहा कि ” यह सागौन अपने राज्य का नहीं है। ” लेकिन पास ही खड़े एक तथाकथित तस्कर ने कहा कि साहब सागौन अपने राज्य का है। Thomas यही है किन्तु सत्य है कि जब छत्तीसगढ़ से रेत भरकर वाहन जा रहा है तो रेत के एक फीट नीचे सागौन कैसे रखा जाएगा? सागौन लकड़ी तो हाल फिलाल ही काटा हुआ दिख रह है। वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा पकड़े गए सागौन को अपना ना बताना यानि कि अपने कार्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। और शासन प्रशासन विभाग के कर्मचारी अधिकारियों को हजारों लाखों वेतन देकर अपने कर्तव्य निभाने के लिए रखने का मतलब ही क्या है। जो अपने कर्तव्य को ना समझे। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो किस पर विश्वास किया जा सकता है यह भी एक प्रश्नवाचक चिन्ह है। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि कोई दूसरा विभाग के कर्मचारी सागौन तस्कर एवं अन्य तस्करों को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कराने के लिए मोटी रकम लेकर सीमा पार कर आते हैं।अगर समय रहते उच्च अधिकारी इस पर अंकुश नही लगाया गया तो इसके गंभीर परिणाम क्षेत्रवासियों को भुगतने पड़ेंगे। यहाँ कोई गरीब अपने मकान के लिए सागौन लाता है तो विभाग उन्हें फौरन कार्यवाही करता है। लेकिन तस्करों पर लगाम लगाने की जगह टीन का ऐनक पहन लेते हैं।
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