रायपुर(गंगा प्रकाश)। चावल के कारोबार को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। खबर मिली है कि रायपुर में किसी ब्रोकर को ईडी ने उठा लिया था। इसके बाद रायगढ़ में भी हलचल मच गई क्योंकि कई राइस मिलर उसके जरिए कारोबार करते हैं। एक बार फिर रायगढ़ का गोंदिया कनेक्शन सामने आया है। कस्टम मिलिंग का चावल जमा करने के बजाय निजी कारोबार को तरजीह देने वाले मिलरों की नींद उड़ी हुई है। ईडी और आयकर विभाग ने पहले भी कुछ राइस मिलरों पर छापेमारी की थी जिसमें बहुत बड़ा तंत्र सामने आया था।
सरकारी धान को उठाकर चावल जमा करने के बजाय उसे प्रदेश से बाहर भेजने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जाता है। इसकी पूरी कहानी रायपुर में बैठे बड़े डीलर और ब्रोकर तय करते हैं। गोंदिया में चावल के बड़े कारोबारी हैं। मिली जानकारी के मुताबिक रायगढ़ के कुछ राइस मिलर इनसे बिल लेते हैं। मतलब गोंदिया से चावल खरीदी का बिल दिखाकर उस चावल को दूसरे जगह बेचने का कारोबार होता है। हकीकत में गोंदिया से कोई चावल खरीदा ही नहीं जाता। उस बिल के नाम पर छग में सरकारी धान के चावल को ओडिशा और झारखंड में बेचा जाता है। इस सिस्टम में कई ब्रोकर संलित होते हैं। उन्हीं में से एक को ईडी द्वारा पूछताछ किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद कई राइस मिलरों की हालत पस्त हो गई है।
धान नहीं है इसलिए चावल जमा नहीं
राइस मिलरों ने फर्जी बिलों के सहारे यहां के धान का चावल दूसरे प्रदेश में बेच दिया। जबकि समितियों से उठाव के बाद पहले यहां चावल जमा किया जाना है। मिलरों ने ब्रोकरों के जरिए यहां का चावल दूसरे प्रदेशों में बेच दिया है। इसलिए मिलिंग में रबी का धान उपयोग किया जा रहा है।
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