गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। कार्यालय ग्रामीण सेवा सहकारी समिति मर्यादित प्र. क्र. 991 ग्राम बासीन में किसानों द्वारा 30 जनवरी को 20ः किसानों का धान खरीदी नही हो पाया था इस लिए किसानों द्वारा मंडी गेट के सामने उग्र आंदोलन किया और 3 बिंदू में मांग रखा जिसमे पहला बिन्दु बचे हुवे किसानों का धान समय अवधि में किया जाए दूसरा अब तक खरीदी किए हुवे धानो के उठाव के लिए परिवहन व्यवस्था करें और तीसरा अभी किसानो द्वारा रविफसल की बुवाई किया जा चुका है लेकिन किसानों को अभी तक पर्याप्त मात्रा में खाद नही मिल पा रहा है जिसकी समय रहते व्यवस्था करे इन तीनों मांगों को लेकर किसानों द्वारा उग्र आंदोलन किया था आंदोलन का असर तुरंत शाम तक देखने को मिला और शाम तक पूर्ण रूप से लिमिट बढ़ा कर किसानों टोकन और धान खरीदी का आदेश जारी हुआ दूसरे दिन किसानों का धान खरीदी का कार्य भी शुरू हुआ दूसरे दिन की खरीदी का निरीक्षण करने मधुबाला रात्रे सभापति जिला पंचायत गरियाबंद अन्नपूर्णा पटेल सरपंच ग्राम पंचायत बासीन रेवा ओगरे तुलश रात्रे पंच ग्राम पंचायत बासीन ने किसानो का हाल और सही व्यवस्था के लिए सेवा सहकारी समिति बासीन मंडी जा कर देखा तो वहा आरक्षित रखे हुए गांव में खेल के लिए क्रिकेट मैदान के खुले मैदान पर अपना धान बेचने के लिए मजबूर हुए किसानों से पूछने पर जानकारी मिल इस बार की धान खरीदी में नहीं 3100 रुपए एकमुस्त प्रति क्विंटल मिला और रविफसल के लिए नहीं समय में खाद मिला धान का उठाव के लिए परिवहन व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान खुले मैदान पर धान बेचने के लिए मजबूर हुए ऐसी स्थिति पिछले पांच सालों में देखने को नहीं मिला जो इस बार के धान खरीदी में पूरा व्यवस्था चरमराया हुआ है किसान परेशान है पहले समय रहते धान खरीदी कर लिया जाता था समय.समय में परिवहन व्यवस्था के साथ खाद भी किसानों के लिए मिल जाता था आन्दोलन के बाद शाम तक लिमिट बढ़ा कर किसानो के धान के टोकन कटा उसके दूसरे दिन खरीदी के अवधि बढ़ाया गया व्यवस्था देखने गई मधुबाला रात्रे अन्नपूर्णा पटेल रेवा ओगरे तुलश रात्रे ने किसानो से कहा अभी तीन मांगों में एक मांग पूरा हुआ है और 2 मांग बचा है शासन प्रशासन के द्वारा समय रहते किसानों को खाद नहीं मिलेगा और धान उठाव के लिए परिवहन व्यवस्था नहीं करेगा तो फिर से किसानो के साथ मिल कर उग्र आंदोलन करेंगे हम हमेशा किसान हित में शासन प्रशासन से पहले भी संघर्ष किए थे और आगे भी संघर्ष करेंगे
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