CG: गरियाबंद में शिक्षा सुधार की नई लहर — काउंसिलिंग से बदलेगी सैकड़ों स्कूलों की तस्वीर, पहले ही दिन 164 शिक्षकों को मिला नई जगह का आदेश
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले में शनिवार का दिन शिक्षा क्षेत्र के इतिहास में एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत लेकर आया। वर्षों से शिक्षकविहीन या एकल शिक्षक आधारित विद्यालयों की चुनौती से जूझते जिले में आज राज्य शासन के निर्देशानुसार प्रारंभ की गई “अतिशेष प्रधान पाठकों एवं सहायक शिक्षकों की काउंसिलिंग प्रक्रिया” ने एक उम्मीद की नई किरण जगाई है।
शुरुआत से ही पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों की बुनियाद पर खड़ी इस प्रक्रिया में पहले ही दिन 164 शिक्षकों को उनके चयनित विद्यालयों में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया गया। इससे न सिर्फ जिले के दूरस्थ अंचलों को नियमित शिक्षक मिलेंगे, बल्कि शिक्षकों को भी अपनी पसंद के अनुसार काम करने का अवसर मिलेगा।

कलेक्टर श्री उइके की मौजूदगी में प्रक्रिया की भव्य शुरुआत
इस ऐतिहासिक काउंसिलिंग का आयोजन गरियाबंद के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किया गया, जहाँ कलेक्टर बी.एस. उइके स्वयं मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी की। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठता क्रम में प्रधान पाठकों की काउंसिलिंग से हुई, जिसके बाद सहायक शिक्षकों को बुलाया गया।
जैसे ही मंच पर पहले शिक्षक का नाम पुकारा गया, पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। शिक्षकों के चेहरों पर आत्मविश्वास और संतोष का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। किसी ने कहा — “इतने वर्षों में पहली बार हमारी आवाज़ को इस तरह सुना गया है।”

तकनीकी सहायता और डिजिटल डिस्प्ले ने बढ़ाया विश्वास
काउंसिलिंग स्थल को पूरी तरह डिजिटल तकनीक से सजाया गया था। रिक्त पदों की सूची एलईडी स्क्रीन पर लगातार प्रदर्शित की जा रही थी, जिससे सभी शिक्षकों को वास्तविक समय में जानकारी मिलती रही। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विद्यालयवार रिक्तियों और चयनित शिक्षकों की सूची भी दीवारों पर चस्पा की गई थी।
कलेक्टर बोले – “बदलेगा स्कूलों का चेहरा”
काउंसिलिंग के बाद उपस्थित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री उइके ने कहा,
“यह महज़ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के पुनरुद्धार का पहला कदम है। जब योग्य शिक्षक सही जगह पर होंगे, तभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षकविहीन विद्यालयों और एकल शिक्षक आधारित स्कूलों में योग्य शिक्षकों की पदस्थापना से शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
संवर्गवार पदस्थापना – प्राथमिकता और संतुलन का अद्भुत उदाहरण
आज के दिन जिन शिक्षकों को नियुक्ति आदेश मिला, उनमें टी संवर्ग के 6 प्रधान पाठक (प्राथमिक शाला), 133 सहायक शिक्षक और ई संवर्ग के 25 शिक्षक शामिल थे। वरिष्ठता के आधार पर चयन की यह प्रक्रिया सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ए.के. सारस्वत ने बताया कि यह काउंसलिंग सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षक हित और छात्र हित के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि अगले चरणों में शेष अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग भी की जाएगी।
शिक्षकों में दिखा उत्साह और आभार
पदस्थापना आदेश पाते ही शिक्षक समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। कुछ शिक्षकों ने बताया कि वे वर्षों से एक ही विद्यालय में अटके हुए थे, जहाँ छात्रों की संख्या नगण्य थी। अब उन्हें ऐसे विद्यालय में सेवा देने का मौका मिलेगा जहाँ उनकी योग्यता का सही उपयोग होगा।
शिक्षिका, जिन्हें आज ही गरियाबंद ब्लॉक के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ किया गया, ने कहा,
“मैं वर्षों से ट्रांसफर का इंतजार कर रही थी। आज की प्रक्रिया ने यह सपना सच कर दिया। अब मैं नये उत्साह से काम करूँगी।”
सुधार की ओर बड़ा कदम
इस प्रक्रिया से यह साफ हो गया है कि गरियाबंद जिला प्रशासन राज्य शासन की मंशा को ज़मीन पर उतारने में संकल्पबद्ध है। पारदर्शी, तकनीक-संलग्न और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था ही किसी जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बना सकती है — और आज इसका सशक्त उदाहरण गरियाबंद ने पेश किया है।

आने वाले दिनों में जब ये शिक्षक नए विद्यालयों में अपनी सेवाएं देंगे, तब जाकर इसका वास्तविक असर ग्रामीण छात्रों की शिक्षा पर दिखेगा। तब जाकर शिक्षा का वह सपना साकार होगा जिसमें हर बच्चे को उसके घर के पास एक समर्पित और योग्य शिक्षक मिल सके।
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