Brekings: छुरा के अकलवारा हाई स्कूल में प्रिंसिपल के खिलाफ फूटा गुस्सा, परीक्षा में हेराफेरी का बड़ा आरोप – स्कूल में ताला, पढ़ाई ठप
गरियाबंद/छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा ब्लॉक स्थित अकलवारा हाई स्कूल में शनिवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्कूल के प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा के खिलाफ ग्रामीणों और छात्र-पालकों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज पालकों और ग्रामीणों ने प्रिंसिपल की कथित मनमानी, छात्रों के साथ लगातार गलत व्यवहार और परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी के विरोध में स्कूल गेट में ताला जड़ दिया और जमकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन से स्कूल परिसर में घंटों अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। 11वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में गंभीर हेराफेरी की गई, जिसके चलते कई छात्र-छात्राएं, जो पास थे, उन्हें जानबूझकर फेल कर दिया गया। पालकों का कहना है कि बच्चों ने सालभर मेहनत की, लेकिन प्रिंसिपल की मनमानी ने उनका भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। इस फैसले से बच्चों का आत्मविश्वास टूट गया और कई बच्चे डिप्रेशन की कगार पर पहुंच गए हैं।
प्रदर्शनकारी पालकों का क्या कहना है?
प्रदर्शनकारी पालकों का कहना है –
“हमारे बच्चों के साथ अन्याय हुआ है। प्रिंसिपल वर्मा छात्रों को डांटने-फटकारने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। इस बार तो हद ही हो गई। पास हुए बच्चों को फेल दिखाकर उनका करियर बर्बाद करने की कोशिश की गई। हम यह अन्याय कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
क्या मांग रखी गई?
ग्रामीणों और पालकों ने साफ शब्दों में प्रशासन से दो प्रमुख मांगें रखी हैं –
- प्रिंसिपल जे.पी. वर्मा को तत्काल पद से हटाया जाए।
- परीक्षा परिणाम में की गई हेराफेरी की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
पालकों ने चेतावनी दी है कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, वे स्कूल संचालन में किसी भी तरह का सहयोग नहीं करेंगे। फिलहाल स्कूल में ताला बंदी के चलते पढ़ाई पूरी तरह ठप है और बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
छात्रों का दर्द:
स्कूल के एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा –
“हमसे कहा गया कि तुम फेल हो। हमारी कॉपियां भी नहीं दिखाई गईं। हमारी मेहनत बेकार हो गई। घर में सब लोग दुखी हैं। पता नहीं अब आगे क्या होगा।”
एक अन्य छात्रा ने रोते हुए कहा –
“हम गरीब परिवार से आते हैं। पूरे साल पढ़ाई की। पास थे, फिर भी फेल कर दिया गया। अब दोबारा कैसे पढ़ाई करें?”
स्कूल का माहौल:
प्रदर्शन के दौरान स्कूल गेट पर ताला जड़ने से शिक्षकों को भी अंदर प्रवेश करने में दिक्कत हुई। बच्चों को वापस घर भेज दिया गया। पूरे गांव में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। माता-पिता और ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन की स्थिति:
घटना की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। बीईओ कार्यालय से कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन पालक अड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारी जाँच के लिए डीईओ और जिला कलेक्टर तक ज्ञापन भेजने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि खबर लिखे जाने तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
क्या कहते हैं शिक्षा विशेषज्ञ?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करती हैं बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी क्रूर मजाक हैं। यदि बच्चों के भविष्य को बचाना है तो ऐसी मनमानी पर तत्काल अंकुश लगाना होगा।
ग्राउंड रिपोर्ट :
अकलवारा हाई स्कूल में प्रिंसिपल के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन कहीं न कहीं शिक्षा व्यवस्था की कमजोर पड़ती जिम्मेदारी का उदाहरण है। जहां एक ओर शासन शिक्षा को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि स्कूल स्तर पर ही छात्रों को न्याय नहीं मिले तो यह पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब तक इस मामले पर संज्ञान लेकर उचित कदम उठाता है, या फिर छात्रों और पालकों का यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।