हर माह दो बार प्रदोष व्रत किया जाता है, जिसमें से एक कृष्ण पक्ष और एक शुक्ल पक्ष में पड़ता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है। चूंकि सावन चल रहा है, ऐसे में सावन का पहला प्रदोष 22 जुलाई को है। यह प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है, ऐसे में इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। जानकारी दे दें कि भौम प्रदोष व्रत के दिन शिव पूजा करने से मांगलिक दोष ठीक हो जाते हैं। साथ करियर संबंधी परेशानी भी खत्म हो जाती है।
सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 22 जुलाई की सुबह 07.05 बजे हो रहा है, जो 23 जुलाई की प्रात: 04.39 बजे होगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त- शाम 7 बजकर 18 मिनट से रात 9 बजकर 22 मिनट तक
भोग में क्या लगाएं?
प्रदोष व्रत के दिन जातक शिव को उनके प्रिय भोग लगाएं। भगवान शिव को खीर, बर्फी, मालपुआ, ठंडाई और भांग का भोग प्रिय है। इसके साथ ही शिवलिंग पर धतूरा, शमी, कनेर के पुष्प अर्पित करें। बता दें कि भौम प्रदोष के दिन व्रत और पूजन से भगवान शिव के साथ हनुमान जी की भी कृपा प्राप्त होती है, जिससे साधक को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत वाले दिन गलती से भी तामसिक भोजन न करें। इस दिन हो सके तो नमक का सेवन न करें। भगवान शिव की पूजा के दौरान गलती से भी तुलसी दल, नारियल और टूटे चावल के अक्षत को शामिल न करें और न ही केतकी के पुष्प चढ़ाएं। इससे भगवान नाराज हो सकते हैं।
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