छुरा (गंगा प्रकाश)। डिजिटल युग में जहां मोबाइल और इंटरनेट ने जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने ठगी और जालसाजी के नए-नए हथकंडे भी ईजाद कर लिए हैं। इसी गंभीर खतरे को देखते हुए गरियाबंद पुलिस ने सोमवार 25 अगस्त को शासकीय महाविद्यालय एवं कचना धुरवा महाविद्यालय छुरा में साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

स्टूडेंट्स को दिए गए जरूरी “डिजिटल सुरक्षा के मंत्र”
थाना छुरा पुलिस टीम ने छात्रों को ऑनलाइन फ्रॉड के खतरों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने कहा—
- अनजाने लिंक और APK File कभी डाउनलोड न करें।
- किसी भी हाल में OTP शेयर न करें।
- बैंक अकाउंट किराए पर देना कानूनी अपराध है, इसे हर हाल में टालें।
“डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई चीज नहीं होती, यह सिर्फ फ्रॉड का नया हथकंडा है। यदि किसी पर कोई मामला होता है तो पुलिस सीधे सामने आकर जांच करती है।
साइबर अपराध की शिकार होने पर क्या करें?
पुलिस ने छात्रों को बताया कि यदि कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकता है। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, उतनी जल्दी अपराधियों को ट्रैक कर पैसे वापस कराने की संभावना बढ़ जाती है।
बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसने की कवायद
पिछले कुछ समय में गरियाबंद सहित पूरे छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन ठगी, फेक कॉल, नकली कस्टमर केयर नंबर और फर्जी निवेश स्कीम के जरिए युवाओं को निशाना बनाने की घटनाएं बढ़ी हैं। पुलिस का मानना है कि जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है जिससे युवा पीढ़ी खुद को और अपने परिवार को इन अपराधों से बचा सकती है।
छात्रों में उत्साह, कई सवाल-जवाब भी हुए
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पुलिस अधिकारियों से साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। पुलिस ने उन्हें मोबाइल बैंकिंग से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा तक के उपाय बताए। छात्रों ने भी इस पहल को बेहद सराहा और कहा कि इस तरह की वर्कशॉप नियमित रूप से होनी चाहिए।
कुल मिलाकर छुरा में हुआ यह साइबर जागरूकता कार्यक्रम न सिर्फ छात्रों के लिए डिजिटल सुरक्षा का पाठ बना, बल्कि यह संदेश भी दिया कि अगर हर कोई सतर्क और जागरूक रहेगा तो साइबर अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं बचेगी।