गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ में हर साल 23 नवंबर को मितानीन दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी अवसर पर यह कार्यक्रम जामगांव में आयोजित किया गया, मितानिन, जिन्हें छत्तीसगढ़ में आशा कार्यकर्ता के नाम से भी जाना जाता है, ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थ्य सेवाआें की रीढ़ हैं। वे हर घर तक स्वास्थ्य योजनाओं को पहुंचाने और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य करती है, प्रत्येक गांव में जनसंख्या के अनुसार मितानिनों की नियुक्ति की जाती है, जो प्राथमिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का समाधान करती हैं। सरपंच रेणुका हीरू डहरे ने कहा कि मितानीन दीदी स्वास्थ्य योजनाआें की जानकारी देने, उनका लाभ पहुंचाने और बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने का काम करती हैं। उपसरपंच पार्वती दीवान ने बताया कि ग्रामीण महिलाएं अक्सर अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कम जानकारी रखती है, और सामाजिक ताने-बाने के कारण पुरूशों से खुलकर बात नहीं कर पाती। ऐसे में मितानिनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे महिलाएं होने के कारण गांव की महिलाएं बेझिझक अपनी बात रख पाती है। मितानिनें समय समय पर टीकाकरण के लिए लोगों को प्रेरित करती है। महिलाओं को प्रसव से पहले की देखभाल सिखाती हैं, और जच्चा बच्चा दोनों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देती हैं। इसके अलावा, वे घर घर जाकर लोगों को मलेरिया, निमोनिया, टीबी, हैजा जैसी बीमारियों के प्रति भी जागरूक करती रहती हैं। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए महिलाएं कभी भी अपनी मितानिन से संपर्क कर सकती है। इस अवसर पर सरपंच रेणुका हीरू डहरे, उपसरपंच पार्वती दीवान, सचिव गौकरण साहू, शिवराम सिंह वरिश्ठ पंच, हीरू डहरे, पार्वती पटेल, गणेश दीवान, सुनीता रात्रे, फुलेश्वरी धु्रव, गीता साहू, दशोदा साहू, जानकी कोसरे, सौहाद्र विश्वकर्मा समन्वयक गायत्री रात्रे, ब्लाक कोआर्डिनेटर नीतू तिवारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
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