गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। शासकीय स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के नाम पर राज्य सरकार ने शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया था। लेकिन सरकार ने स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों की जानकारी संकलित कर ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत तथा निगम को देने का अजीबोगरीब फरमान जारी किया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के फिंगेश्वर विकासखंड अध्यक्ष यशवंत कुमार साहू, जिला कोशाध्यक्ष सोहनलाल सेन, ब्लाक सचिव शोभाराम साहू, आरडी साहू, सुनीता यादव, अंजनी यादव, आशा धु्रव ने सरकार से पूछा है कि क्या स्कूलों में बच्चों को विशय ज्ञान देना अत्यावश्यक सेवा नहीं है ? उन्होंने इस आदेश का विरोध किया है। फेडरेशन के कहना है कि अधिकांश स्कूलों बाउंड्रीवाल नहीं है। यदि है तो जीर्णोद्धार की स्थिति में है। ऐसे में शाला प्रमुख शिक्षक आवारा कुत्तों का शाला में प्रवेश के रोकथाम हेतु प्रबंध कैसे करेंगे ? आवारा कुत्तों से क्या शिक्षकों को खतरा नहीं है ? बाउंड्रीवाल नहीं होने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा देर रात स्कूलों में होता है। जिसके कारण शालेय वातावरण दूशित होता है, बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। शाला प्रमुख शिक्षक को इसके रोकथाम के लिए जिला प्रशासन एवं जनमानस से सहयोग नहीं मिलता। अनेक शाला भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। इस स्थिति में मात्र कोर्ट के आदेश पर शिक्षकों को प्रताड़ित करना न्याय संगत नहीं है। इस आदेश पर पुर्नविचार होना चाहिए।
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