गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। इस वर्ष धान बेचने में किसानों की परेशानी, कठिनाईयों, दुविधा न सिर्फ कम हो रही है बल्कि बढ़ती ही जा रही है। एग्रीस्टेक में पंजीकरण, धान बेचने के प्रारंभिक दिनों में कर्मचारियों की हड़ताल, टोकन कटवाने में काफी दिक्कत एवं परेशानी, टोकन कटवाते समय रकबा में अनाप शनाप कटौती की परेशानियों तो अभी चल ही रही है कि किसान अब अपनी जमीन अनुसार 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान बेचने से भी वंचित किए जा रहे हैं। फिंगेश्वर सहकारी बैंक अन्तर्गत गुण्डरदेही समिति अन्तर्गत ग्राम तरजुंगा के किसान उत्तम राजवंशी के 1.5 एकड़ खेत का लगभग 31.5 क्विंटल धान बिकना है। उन्होंने आनलाइन टोकन कटाया तो उन्हें 3 दिसंबर को 25 क्विंटल धान बेचने का टोकन आनलाईन प्राप्त हुआ। उन्होंने 3 दिसंबर को 25 क्विंटल धान बेचा और 4 दिसंबर को पुनः टोकन हेतु आनलाईन सर्च किया तो उन्हें व्हाटशाप में मेसेज आया कि वे सीमांत कृशक की श्रेणी में है अतः आपको एक ही बार धान बेचने की पात्रता है। श्री राजवंशी ने बताया कि उसने प्रथम प्रयास में ही पूरा धान 31.5 क्विंटल का आप्शन डाला था। परंतु उस समय मात्र 25 क्विंटल की ही लिमिट शेश थी। अब यह कृशक अपने लिमिट का 6.5 क्विंटल धान बेचने भटक रहा है। इस बारे में सहकारी बैंक फिंगेश्वर के प्रबंधक शेषनारायण पान्डे से पूछने पर बताया कि 2 एकड़ तक के किसान से मात्र एक बार में ही धान लेना है। कृषक को आप्शन पूछा जाता है और उसे अपनी लिमिट से कम धान बेचने का आप्शन आता है तो आप्शन स्वीकार नहीं करना है। अगर किसी किसान ने कम धान बेच दिया है तो हम उसे धान बेचने का दूसरा मौका नहीं दे पाएंगे। ऐसे कृषक को खाद्य विभाग में और शेश धान विक्रय करने आवेदन करना होगा। श्री पान्डे ने बताया कि इस नियम के बारे में हमने सभी खरीदी केन्द्र में सूचना लगवा दी है। सरकार की इस जटिल प्रक्रिया से छोटे कृषकों को बहुत ज्यादा परेशानी हो रही है। पीड़ित कृषक उत्तम राजवंशी ने कहा कि मात्र 5-6 क्विंटल धान बेचने खाद्य विभाग का चक्कर काफी मुसीबत भरा है। कृषक ऐसी तकनीकी जानकारी समझ नहीं पाता और उसे बेवजह बचत धान औने पौने दाम पर बेचने पर हजारों रूपयों की क्षति हो जावेगी।
There is no ads to display, Please add some

