गरियाबंद/कोपरा (गंगा प्रकाश)। भारत रत्न एवं छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर बनने वाला अटल परिसर इन दिनों सम्मान से ज्यादा विवादों की वजह बन गया है। नगर पंचायत कोपरा में प्रशासन की रोक और आपत्तियों को दरकिनार करते हुए विवादित भूमि पर एक बार फिर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इस कदम से नगर में नाराजगी, आक्रोश और सवालों का तूफान खड़ा हो गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस स्थान पर अटल जी की प्रतिमा और परिसर का निर्माण किया जा रहा है, वहीं पास में सरस्वती शिशु मंदिर का मूत्रालय मौजूद है। लोग पूछ रहे हैं—क्या यही है भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का सम्मान?

प्रशासन की रोक बेअसर, अध्यक्ष का अड़ियल रवैया!
नगर पंचायत अध्यक्ष के कथित अड़ियल रवैये के चलते वह निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया गया है, जिस पर पहले ही प्रशासन रोक लगा चुका था। बिना विवाद का निराकरण किए, नियम-कायदों को ताक पर रखकर निर्माण आगे बढ़ाना नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
हैंडपंप के ऊपर निर्माण? नियमों की खुली अवहेलना
नगर निवासी नरेश निषाद ने एसडीएम राजिम को दिए आवेदन में खुलासा किया है कि निर्माण स्थल के बीचोंबीच सार्वजनिक जलस्रोत हैंडपंप मौजूद है। शासन के स्पष्ट नियमों के अनुसार किसी भी जलस्रोत के आसपास निर्माण प्रतिबंधित है, इसके बावजूद कार्य जारी है। इतना ही नहीं, निर्माण स्थल संकरा है और सीधे आवागमन मार्ग से सटा हुआ है, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

निजी भूमि से सटा निर्माण, विवाद गहराया
नरेश निषाद के अनुसार अटल परिसर उनकी निजी भूमि खसरा नंबर 4404 से सटा हुआ है। इससे न केवल निजी अधिकारों का हनन हो रहा है, बल्कि भविष्य में कानूनी विवाद भी तय माना जा रहा है।
शाम होते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस स्थान पर निर्माण हो रहा है, वहां शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है। इससे क्षेत्र की शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

भाजपा में भी अंदरूनी नाराजगी
मामले को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में भी अंदरखाने नाराजगी उभरकर सामने आ रही है। हालांकि वे खुलकर विरोध नहीं कर रहे, लेकिन उनका मानना है कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेता के नाम पर बनने वाला परिसर किसी मुख्य चौक या प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर होना चाहिए था, न कि विवादित और अव्यवस्थित जगह पर।
सवाल वही—अटल जी का ये कैसा सम्मान?
नगर में अब एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए?
एसडीएम राजिम कार्यालय में नया आवेदन पहुंच चुका है और अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या निर्माण पर फिर से रोक लगेगी या नियमों को यूं ही नजरअंदाज किया जाता रहेगा—इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

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