गरियाबंद/फिंगेश्वर(गंगा प्रकाश)। समीपस्थ ग्राम कौन्दकेरा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार श्रोताओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव मिला। प्रवचनकर्ता पं. भीमप्रसाद शर्मा ने भक्त प्रह्लाद और धु्रव की कथा का वर्णन किया, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। पं.शर्मा ने बताया कि भक्त प्रहलाद का जन्म असुरकुल में हुआ था। उनके पिता हिरण्यकश्यप और चाचा रिण्याक्ष भगवान विष्णु के प्रति शत्रुता का भाव रखते थे। इसके विपरीत प्रहलाद विष्णु भगवान के परम भक्त थे। इससे नाराज होकर उनके पिता ने उनकी हत्या करने की चेष्टा की, जिसे भगवान ने विफल कर हिरण्यकश्यप का वध कर दिया। कथा में वामन अवतार व होलिका दहन का प्रसंग भी सुनाया गया। उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद और धु्रव को अपने जीवन में कठिन परीक्षाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भगवान का नाम कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि ईश्वर प्राप्ति में आयु कोई बाधा नहीं है, जिसका प्रमाण है कि बाल भक्त धु्रव को अल्पायु में ही भगवान के दर्शन प्राप्त हुए।
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पं. शर्मा जी ने परमात्मा प्राप्ति के दो मार्ग बताए-सद्मार्ग, जिसे भक्त प्रह्लाद ने अपनाया और असद मार्ग, जिससे हिरण्यकश्यप को मोक्ष मिला। उन्होंने श्रोताओं को समझाया कि जीवन की वास्तविकता को समझते हुए हर पल सत्कर्म और भगवान का भजन करना चाहिए। इस मौके पर बृज लाल, शांतू लाल साहू, मनोज साहू, परशु राम, हेमू साहू समेत बड़ी संख्या में श्रोतागण मौजूद रहे।



