फॉर्म–7 के जरिए विशेष समुदाय के 55 मतदाताओं के नाम काटने का आरोप, दोषियों पर एफआईआर की मांग

प्रकाश कुमार यादव 

छुरा (गंगा प्रकाश)। नगर पंचायत छुरा में मतदाता सूची से नाम हटाने के कथित मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष चमन यादव के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय छुरा एवं पुलिस थाना छुरा पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि सुनियोजित तरीके से फर्जी फॉर्म–7 प्रस्तुत कर लगभग 55 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की गई है।

पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम (SIR) के दौरान कुछ व्यक्तियों ने षड्यंत्रपूर्वक झूठे आधार पर फॉर्म–7 का दुरुपयोग किया। आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से एक विशेष समुदाय के मतदाताओं को लक्ष्य बनाकर उनके नाम सूची से हटाने का प्रयास किया गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।

लोकतंत्र और मताधिकार पर सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि इस प्रकार फर्जी आपत्तियां दर्ज कर नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगाई गई तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। पार्टी नेताओं ने इसे न केवल लोकतंत्र का मजाक उड़ाने वाला कृत्य बताया, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक एवं मौलिक अधिकारों के हनन का प्रयास भी करार दिया।

जिलाध्यक्ष चमन यादव ने कहा कि यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 212 का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लोक सेवक को जानबूझकर झूठी सूचना देता है, जबकि वह सत्य बताने के लिए विधिक रूप से बाध्य है तो उसे छह माह तक का कारावास, पांच हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। यदि झूठी सूचना किसी अपराध या अपराधी से संबंधित हो तो सजा दो वर्ष तक हो सकती है।

चमन यादव ने कहा मतदाता सूची से नाम हटवाना कोई साधारण प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है। यह सीधे-सीधे व्यक्ति के मताधिकार को प्रभावित करता है। यदि इसमें फर्जीवाड़ा या दुर्भावनापूर्ण मंशा सिद्ध होती है तो यह गंभीर आपराधिक मामला बनता है।

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निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग

ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। जिन लोगों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर फॉर्म–7 प्रस्तुत किया है, उनके विरुद्ध विधिवत एफआईआर दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे।

पदाधिकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आवश्यक कार्रवाई न होने की स्थिति में पार्टी सड़क की लड़ाई लड़ेगी जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ किसी भी चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है और इससे आमजन का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है।

प्रशासन का आश्वासन

तहसील कार्यालय और पुलिस थाना छुरा में ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिकारियों ने पार्टी प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि प्रस्तुत शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी। संबंधित अभिलेखों और प्रस्तुत किए गए फॉर्म–7 की वैधता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी ने जानबूझकर झूठी या भ्रामक जानकारी देकर नाम विलोपन का आवेदन किया है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

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बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे मौजूद

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष श्रवण यादव, लोकसभा अध्यक्ष महेश यादव, जिलाध्यक्ष चमन यादव, जिलाध्यक्ष यूथ हरीश कुमार पटेल, जिलाध्यक्ष अल्पसंख्यक मोहन सिन्हा, जिला महासचिव नंद लाल यादव, ब्लॉक अध्यक्ष ईश्वर पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष यूथ दलेश्वर नागेश, ब्लॉक अध्यक्ष यूथ नवीन गायकवाड़, नगर अध्यक्ष छुरा इरफान खान, उपाध्यक्ष जिसान मेमन, संगठन मंत्री साहिद खान एवं असगर खान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

राजनीतिक सरगर्मी तेज

छुरा नगर पंचायत में मतदाता सूची को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया है। विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि जिला और प्रदेश स्तर पर भी राजनीतिक बहस का विषय बन सकता है। वहीं यदि शिकायत निराधार पाई जाती है तो यह भी स्पष्ट होगा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता और तथ्यों की पुष्टि कितनी महत्वपूर्ण है।

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