छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरीब को पक्का मकान देने की सरकारी मंशा एक बार फिर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच उलझती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्राम मुड़ागांव, तहसील छुरा में बन रहे एक हितग्राही के आवास निर्माण पर सरपंच की शिकायत के बाद प्रशासन ने रोक लगा दी है। मामला सामने आते ही गांव से लेकर तहसील कार्यालय तक चर्चा का विषय बन गया है।
21 साल से उसी जमीन पर रह रहा परिवार
विवाद का केंद्र वही जमीन है, जिस पर हितग्राही पिछले 21 वर्षों से परिवार सहित निवास कर रहा है। हितग्राही का कहना है कि उसी स्थान पर उसका कच्चा मकान पहले से मौजूद था और वर्षों से वह वहीं रहकर गुजर-बसर करता आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब उसे पक्का घर स्वीकृत हुआ, तो उसने उसी भूमि पर निर्माण शुरू कराया।
वीडियो में छलका दर्द
मामले से जुड़े पहले वीडियो में हितग्राही कैमरे पर अपना दर्द बयां करता नजर आ रहा है। उसने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत सरपंच गोदावरी दिवान ने व्यक्तिगत द्वेष और पंचायत राजनीति के चलते तहसीलदार कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद बिना उसकी बात सुने निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। हितग्राही का कहना है कि योजना का लाभ मिलने के बावजूद उसे फिर से बेघर होने का डर सता रहा है।
जमीन की हकीकत पर उठे सवाल
दूसरे वीडियो में जमीन से संबंधित जानकारी सामने आई है। वीडियो में बताया गया है कि विवादित स्थल पर लंबे समय से आवासीय उपयोग होता आ रहा है और हितग्राही का परिवार वहीं निवासरत है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि जमीन वास्तव में अवैध या शासकीय थी, तो 21 वर्षों तक किसी ने आपत्ति क्यों नहीं उठाई? अचानक प्रधानमंत्री आवास का निर्माण शुरू होते ही शिकायत सामने आना ग्रामीणों को भी खटक रहा है।

सरपंच की शिकायत, प्रशासन का आदेश
सरपंच की शिकायत के आधार पर नायब तहसीलदार छुरा ने निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश में पटवारी को मौके का निरीक्षण कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा थाना प्रभारी को आवश्यक सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, निर्माण रोकने की कार्रवाई से पहले मौके की विस्तृत जांच न होने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गांव में उबाल, ग्रामीणों का समर्थन
घटना के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए है, लेकिन यहां गरीब को ही परेशान किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर चल रही राजनीति का खामियाजा एक जरूरतमंद परिवार भुगत रहा है। कई ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द निर्माण की अनुमति दी जाए।
गरीब की छत पर राजनीति?
एक ओर सरकार “सबको आवास” का नारा दे रही है, दूसरी ओर जमीनी स्तर पर गरीब हितग्राही अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बीच फंसता नजर आ रहा है। सवाल यह भी है कि क्या जांच के नाम पर गरीब का मकान अधर में लटकता रहेगा, या फिर सच्चाई सामने आने के बाद उसे उसका हक मिलेगा?
अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि यह मामला नियमों के पालन का है या फिर पंचायत की राजनीति में गरीब के सपने को कुचलने का।
फिलहाल, मुड़ागांव में यही चर्चा है—गरीब को घर मिलेगा या फिर कागज़ी विवाद में उसका आशियाना ढह जाएगा?
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