गरियाबंद/देवभोग (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सितलीजोर में पंचायत सचिव नवीना मांझी के खिलाफ ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए गए हैं। मामले को गंगा प्रकाश और छत्तीसगढ़ न्यूज पोर्टल द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें कई गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है।
जांच टीम द्वारा ग्रामीणों से पूछताछ के दौरान सामने आया कि राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं के नाम पर ग्रामीणों से अवैध रूप से पैसे लिए जा रहे थे। इसके अलावा मनरेगा मजदूरी भुगतान और शौचालय निर्माण मद की राशि में भी गड़बड़ी पाए जाने की बात जांच में सामने आई है।

ग्रामीणों ने जांच टीम को बताया कि पंचायत सचिव नवीना मांझी पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहती थीं, जिससे पंचायत कार्य प्रभावित हो रहे थे और आम लोगों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
एनकॉर्ड समिति की बैठक में कलेक्टर के निर्देश, ड्रिंक एंड ड्राइव पर लाइसेंस निलंबन और अंतर्राज्यीय निगरानी बढ़ाने पर जोर
इन मामलों की हुई पुष्टि
जांच रिपोर्ट में जिन मामलों की पुष्टि हुई है, उनमें जयकुमार नागेश और धर्मु नागेश से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर राशि लेना शामिल है। वहीं चैयतु राम पिता रूपधर से मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए 1500 रुपये लेने की पुष्टि हुई है।
इसके अलावा बखरी शेड योजना के नाम पर पानो बाई से 1500 रुपये तथा रेमती बाई से भी 1500 रुपये लेने की बात जांच में सही पाई गई है।

सूत्रों के अनुसार मनरेगा के कुछ हितग्राहियों को मजदूरी राशि समय पर नहीं मिली तथा शौचालय निर्माण मद की राशि वितरण में भी अनियमितता रही, जिसे जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है।
नौतपा की भीषण गर्मी के बीच खेतों में आगजनी, जिला प्रशासन की अपील बेअसर
उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट
जनपद पंचायत देवभोग की मुख्य कार्यपालन अधिकारी भारतीय साय भगत ने जांच रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए बताया कि पूरी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई वरिष्ठ स्तर पर की जाएगी।
इधर ग्रामीणों में अब कार्रवाई को लेकर उम्मीद बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध वसूली और योजनाओं में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।




