अनुमति 10 पेड़ों की, कटे 50 से अधिक; जेसीबी से समतलीकरण, प्रशासनिक चुप्पी से उठे गंभीर सवाल

हरियाली से वीरानी तक का बदला मंजर

छुरा (गंगा प्रकाश)। छुरा विकासखंड के ग्राम नयापारा स्थित राजस्व क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आन से क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। जानकारी के अनुसार लगभग 7.26 एकड़ भूमि, जो डिप्टी कलेक्टर तुलसीराम मरकाम की धर्मपत्नी प्रभातबेला मरकाम के नाम दर्ज बताई जा रही है, वहां दो जेसीबी मशीनों के माध्यम से 50 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया। कुछ ही महीनों पहले तक यह क्षेत्र घने वृक्षों और प्राकृतिक हरियाली से आच्छादित था जहां स्थानीय लोग इसे छोटे जंगल के रूप में पहचानते थे। अब वही इलाका पूरी तरह समतल और बंजर नजर आ रहा है।

औषधीय, फलदार और इमारती पेड़ों का व्यापक नुकसान

ग्रामीणों के मुताबिक कटाई के दौरान पीपल जैसे औषधीय वृक्ष, महुआ जैसे फलदार पेड़ और साजा जैसे बहुमूल्य इमारती लकड़ी देने वाले वृक्ष बड़ी संख्या में नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा कई छोटे-बड़े वन औषधीय पौधे भी इस कार्रवाई की भेंट चढ़ गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण था, जहां पक्षियों का बसेरा, छांव और जैव विविधता का अच्छा खासा विस्तार था। पेड़ों के इस अंधाधुंध सफाये से न केवल प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा है, बल्कि ग्रामीणों की आजीविका और पारंपरिक संसाधनों पर भी असर पड़ा है।

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क्या नियमों की अनदेखी कर की गई कार्रवाई?

इस पूरे घटनाक्रम ने नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर इस तरह की पेड़ कटाई के लिए संबंधित विभाग से अनुमति लेना, सीमित संख्या में कटाई करना और पर्यावरणीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन यहां जिस तरह भारी मशीनों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर पेड़ों को उखाड़ा गया, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की गई। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि यही कार्य किसी आम नागरिक द्वारा किया जाता, तो अब तक कड़ी कार्रवाई हो चुकी होती।

सूचना के बाद भी प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया

मामले की सूचना मिलते ही छुरा एसडीएम और तहसीलदार को अवगत कराया गया। तहसीलदार मौके पर पहुंचे भी, लेकिन तब तक दर्जनों पेड़ काटे जा चुके थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर मौजूद जेसीबी मशीनों को न तो जब्त किया गया और न ही कटाई को तत्काल प्रभाव से रोके जाने के ठोस प्रयास नजर आए। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली और गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।

अनुमति से कई गुना अधिक कटाई का आरोप

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस भूमि पर केवल 10 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी, लेकिन मौके पर 50 से अधिक पेड़ों के कटने की बात सामने आ रही है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है और संबंधित पक्षों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत बनती है।

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भूस्वामी और प्रशासन का पक्ष

इस मामले में डिप्टी कलेक्टर तुलसीराम मरकाम ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उक्त भूमि को लीज पर दिया गया है, जहां सोलर प्लांट स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि पेड़ों की कटाई एसडीएम कार्यालय के निर्देशानुसार की जा रही है।

वहीं, एसडीएम अंजलि खालखो ने स्पष्ट किया कि केवल 10 पेड़ों की कटाई की अनुमति प्रदान की गई थी। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित सीमा से अधिक पेड़ काटे गए हैं, तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

जवाबदेही और पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावशाली पदों से जुड़े मामलों में अक्सर नियमों के पालन में ढिलाई बरती जाती है, जिससे आम जनता का विश्वास कमजोर होता है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पर्यावरण संरक्षण के नियम केवल आम लोगों के लिए ही सख्ती से लागू होते हैं।

अब निगाहें कार्रवाई पर टिकी

घटना के दो दिन बीत जाने के बाद भी किसी ठोस कार्रवाई का सामने नहीं आना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर सच्चाई सामने लाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


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