नौतपा की भीषण गर्मी से जनजीवन अस्त-व्यस्त
आसमान से बरस रही आग, इंसान से लेकर पशु-पक्षी तक बेहाल
छुरा (गंगा प्रकाश)। नौतपा की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में भीषण गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र में तापमान 43 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसके कारण सुबह से ही गर्म हवाएं चलने लगती हैं और दोपहर होते-होते हालात इतने खराब हो जाते हैं कि सड़कें सुनसान नजर आने लगती हैं। बाजारों में भी सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी कम भीड़ दिखाई दे रही है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं।
गर्मी का सबसे ज्यादा असर अब वन्यजीवों और पक्षियों पर दिखाई देने लगा है। नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में चमगादड़ भीषण गर्मी और लू की चपेट में आकर मर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि चमगादड़ पेड़ों से ठीक उसी तरह नीचे गिर रहे हैं जैसे तेज हवा में पके आम टूटकर गिरते हैं। कई जगहों पर आवारा कुत्ते पेड़ों के नीचे बैठे इन चमगादड़ों के गिरने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।
सामान्यतः चमगादड़ पेड़ों की ऊंची डालियों पर उल्टे लटककर रहते हैं, लेकिन इस बार असहनीय गर्मी के कारण वे पेड़ों की मोटी शाखाओं और खोहों में जाकर छिपने को मजबूर हैं, जहां उन्हें थोड़ी ठंडक मिल सके। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह स्थिति असामान्य है और लगातार बढ़ती गर्मी का गंभीर संकेत भी है।
जानकारों के अनुसार दिन के समय चमगादड़ों की दृष्टि कमजोर होती है। अत्यधिक गर्मी और प्यास के कारण जब वे पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ते हैं तो कई बार बिजली के तारों से टकरा जाते हैं, जिससे करंट लगने से उनकी मौत हो जाती है। नगर के कई हिस्सों में पेड़ों और बिजली तारों के नीचे मृत चमगादड़ पड़े देखे जा सकते हैं। इससे लोगों में चिंता का माहौल है।
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गर्मी का असर केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंसानों की दिनचर्या भी पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। दोपहर के समय सड़कें सूनी हो जाती हैं और लोग घरों में कैद होकर रहने को मजबूर हैं। गर्म हवाओं के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं। सड़कों, दीवारों और यहां तक कि मकानों की छतों से भी आग जैसी तपिश महसूस हो रही है।
ज्यादातर लोग सिर ढंककर, गमछा या टोपी लगाकर और पानी की बोतल साथ लेकर ही बाहर निकल रहे हैं। कई क्षेत्रों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली बार-बार गुल होने से कूलर और पंखे बंद हो जाते हैं, जिससे घरों के भीतर भी राहत नहीं मिल पा रही है। रात के समय भी गर्मी कम नहीं होने से लोगों की नींद प्रभावित हो रही है।
सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी मजदूरों, ठेला संचालकों, रिक्शा चालकों, टैक्सी चालकों, डाक कर्मचारियों और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों को हो रही है। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले लोग तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच काम करने को मजबूर हैं। वहीं भिखारियों, बेसहारा लोगों और राहगीरों के लिए यह गर्मी किसी मुसीबत से कम नहीं है।
स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी गर्मी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों के अनुसार लगातार धूप में रहने और शरीर में पानी की कमी होने से हीटस्ट्रोक, चक्कर आना, उल्टी, कमजोरी, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। चिकित्सकों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। साथ ही अधिक से अधिक पानी पीने, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस का सेवन करने तथा हल्के सूती कपड़े पहनने की अपील की गई है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।
भीषण गर्मी का असर कृषि क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सब्जियों और फूलों की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है। खेतों में पानी की कमी के कारण पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं और कई फसलें झुलसने लगी हैं। पशुओं के लिए भी पानी और चारे की समस्या बढ़ती जा रही है। तालाब और छोटे जलस्रोत सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं, जिससे मवेशियों और पक्षियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
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उधर बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की खपत में भी भारी इजाफा हुआ है। लगातार बढ़ते लोड के चलते कई ट्रांसफार्मर अत्यधिक गर्म हो रहे हैं, जिसके कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। विद्युत विभाग द्वारा नई लाइनें जोड़ने, ट्रांसफार्मरों की निगरानी बढ़ाने और तकनीकी सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को अभी भी पूरी राहत नहीं मिल पा रही है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। अभी तक कोई प्रभावी वर्षा प्रणाली या पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ है, जिसके कारण तापमान में गिरावट की उम्मीद नहीं है।
भीषण गर्मी ने स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि और बिजली व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गंभीर दबाव बना दिया है। ऐसे में प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और विद्युत विभाग को समन्वय बनाकर राहत कार्यों को तेज करने की आवश्यकता है। वहीं आम नागरिकों को भी सावधानी बरतते हुए गर्मी से बचाव के उपाय अपनाने होंगे, ताकि इस जानलेवा मौसम के प्रभाव को कम किया जा सके।
