गरियाबंद/छुरा (गंगा प्रकाश)। जिले के कलेक्टर बी.एस. उइके, पुलिस अधीक्षक नीरज चंद्राकर तथा जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने मंगलवार को मानवता और संवेदनशील प्रशासन की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी जिलेभर में सराहना हो रही है। तीनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो व्यक्तियों को अपने शासकीय वाहन से तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


जानकारी के अनुसार कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत सीईओ थाना छुरा क्षेत्र के ग्राम कनसिंघी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान छुरा रोड स्थित कचना धुरवा के पास एक गंभीर सड़क दुर्घटना दिखाई दी। हादसे में दो राहगीर गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर लहूलुहान अवस्था में पड़े हुए थे। मौके पर लोगों की भीड़ जमा थी, लेकिन घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी।

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घटना को देखते ही कलेक्टर बी.एस. उइके ने अपना काफिला तत्काल रुकवाया। इसके बाद एसपी नीरज चंद्राकर और जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर भी वाहन से उतरकर सीधे घायलों के पास पहुंचे और उनकी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने बिना समय गंवाए एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय दोनों घायलों को अपने ही शासकीय वाहन में बैठाया और स्वयं साथ लेकर जिला अस्पताल गरियाबंद पहुंचे।

अस्पताल पहुंचने के बाद तीनों अधिकारियों ने डॉक्टरों की टीम को घायलों का तत्काल उपचार शुरू करने के निर्देश दिए। चिकित्सकों के अनुसार समय पर अस्पताल पहुंचाए जाने के कारण दोनों घायलों की स्थिति नियंत्रण में है और उनका इलाज जारी है।

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गोल्डन आवर में मदद करना सबसे जरूरी

इस दौरान कलेक्टर और एसपी ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में गोल्डन आवर यानी दुर्घटना के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान घायल व्यक्ति को समय पर चिकित्सा सहायता मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी घायल व्यक्ति की मदद करने से पीछे न हटें और कानूनी प्रक्रिया के डर से बचने के बजाय मानवता का परिचय दें।

राहवीर योजना के तहत मिलता है प्रोत्साहन

अधिकारियों ने बताया कि शासन की राहवीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले गुड सेमेरिटन को शासन द्वारा 25 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य लोगों को दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए प्रेरित करना है।
इस मानवीय पहल के बाद जिलेभर में कलेक्टर, एसपी और जिला पंचायत सीईओ की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की जा रही है।

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