रायगढ़ (गंगा प्रकाश)। रायगढ़ जिले का धरमजयगढ़ वन मंडल हाथियों के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है, लेकिन यहां के जंगलों से जुड़ी त्रासद घटनाएं वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। एक बार फिर छाल रेंज के हाटी बीट में एक हाथी शावक की मृत्यु की खबर ने सबको चौंका दिया है। ग्रामीणों ने सुबह वन विभाग को सूचना दी कि जंगल किनारे बने एक तालाब में एक हाथी शावक मृत पाया गया। वन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। फिलहाल, शावक की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है, और इसे जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

 

विभागीय विफलता या प्राकृतिक आपदा?… 

धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की लगातार हो रही मौतें चिंता का विषय हैं। पिछले कुछ सालों में इस क्षेत्र में हाथी-मानव द्वंद्व और हाथियों की मौत की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इन मौतों के पीछे प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ विभागीय लापरवाही भी हो सकती है।

 

प्रमुख सवाल?…

1. क्या वन विभाग की निगरानी में कमी है?…

   धरमजयगढ़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में वन विभाग का प्रभावी प्रबंधन क्यों नहीं हो पा रहा?

 

2. हाथियों के लिए जल स्रोत कितना सुरक्षित हैं?…

   ग्रामीण क्षेत्रों में बने तालाब और जलाशय हाथियों के लिए जानलेवा क्यों साबित हो रहे हैं?

 

3. मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के उपाय कहां हैं?

   क्षेत्र में लगातार बढ़ते हाथी-मानव द्वंद्व को रोकने के लिए विभाग के पास ठोस योजनाएं क्यों नहीं हैं?

 

वन विभाग की जिम्मेदारी…

धरमजयगढ़ वन मंडल के अधिकारियों पर इस मामले में जवाबदेही तय करना जरूरी है। शावक की मौत चाहे प्राकृतिक हो या लापरवाही का परिणाम, यह वन विभाग के प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर करता है।

 

वर्जन-

कापू के 554 बीट में हाथियों को दल नहा रहा था। नहाने के दौरान डेढ़ से 2 महीने के शावक डूब गया। शव को बाहर निकाल दिया गया है और पीएम की तैयारी चल रही है।

बाल गोविंद साहू (एसडीओ धरमजयगढ़)

 

बहरहाल बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि धरमजयगढ़ वन मंडल में वन्यजीव संरक्षण की नीतियों को पुनर्विचार और सख्त क्रियान्वयन की जरूरत है। सवाल यह है कि आखिर कब तक धरमजयगढ़ के जंगलों में हाथियों की मौतें इसी तरह होती रहेंगी?


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