जनसमस्या सुनने से पहले ही शिविर स्थगित, नई तारीख का अब तक इंतजार; मडेली से खरखरा तक ग्रामीणों में नाराजगी
छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। सरकार जहां सुशासन तिहार-2026 के जरिए गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान करने का दावा कर रही है, वहीं छुरा विकासखंड की 15 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीण इस अभियान के लाभ से वंचित रह गए। वजह बनी एक प्रशासनिक आदेश, जिसके तहत 2 जून को ग्राम पंचायत गायडबरी में प्रस्तावित जनसमस्या निवारण शिविर अंतिम समय में स्थगित कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि जिस शिविर में मडेली, कनेसर, पक्तियां, द्वारतरा, करचाली, खड़मा, करकरा, खैरझिटी, लोहझर, हरदी, जारगांव, पीपरछेड़ी, गायडबरी, देवरी और खरखरा पंचायतों के लोगों की समस्याएं सुनी जानी थीं, वह शिविर अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के कारण टाल दिया गया। इसके बाद से अब तक नई तारीख की घोषणा नहीं हो सकी है।
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ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने राजस्व, वनाधिकार, राशन कार्ड, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी समस्याओं के निराकरण की उम्मीद में आवेदन तैयार कर रखे थे, लेकिन शिविर स्थगित होने से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।

अधिकारियों की ट्रेनिंग, ग्रामीणों की सुनवाई ठप
कलेक्टर कार्यालय से 1 जून 2026 को जारी आदेश में कहा गया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन योजना के तहत शिकायत निवारण के लिए नामांकित जिला एवं विकासखंड स्तरीय अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। इसी कारण 2 जून को गायडबरी में प्रस्तावित जनसमस्या निवारण शिविर स्थगित किया गया।
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लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि सुशासन तिहार जैसे बड़े अभियान के दौरान यदि अधिकारियों का प्रशिक्षण तय था, तो शिविर की तिथि पहले से क्यों निर्धारित की गई? और यदि शिविर स्थगित किया गया तो प्रभावित पंचायतों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों का सवाल— क्या हमारी समस्याएं इंतजार करें?
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा बार-बार सुशासन और त्वरित समाधान की बात कही जाती है, लेकिन जब समस्याएं बताने का अवसर आता है तो शिविर ही स्थगित हो जाता है।
कई ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द नई तिथि घोषित करे और सभी वंचित पंचायतों के लिए अलग से शिविर आयोजित कर लंबित शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करे।

इन पंचायतों पर पड़ा असर
मडेली, कनेसर, पक्तियां, द्वारतरा, करचाली, खड़मा, करकरा, खैरझिटी, लोहझर, हरदी, जारगांव, पीपरछेड़ी, गायडबरी, देवरी और खरखरा पंचायत के ग्रामीण इस निर्णय से सीधे प्रभावित हुए हैं।
मीडिया सवाल
- जब सुशासन तिहार की तिथियां पहले से तय थीं, तो उसी दिन अधिकारियों का प्रशिक्षण क्यों रखा गया?
- शिविर स्थगित होने के बाद नई तिथि की घोषणा अब तक क्यों नहीं हुई?
- जिन पंचायतों के लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे, उनकी समस्याओं का समाधान कब होगा?
- क्या प्रभावित पंचायतों के लिए अलग से विशेष शिविर लगाया जाएगा?





