Brekings: तालाब से निकली मुरूम, जेब में गया पैसा! सांकरा के मांघी तालाब में अवैध उत्खनन का खेल, ग्रामीणों में उबाल – “पानी भरने से पहले हो जांच”

 

धरसीवा (गंगा प्रकाश)। तालाब गांव का श्रृंगार होता है, जीवन होता है। लेकिन धरसीवा विकासखंड के ग्राम पंचायत सांकरा का मांघी तालाब कुछ लोगों के लिए सिर्फ कमाई का अड्डा बनकर रह गया है। तालाब के नाम पर सैकड़ों ट्रक मुरूम निकालकर बेच दिए गए, लेकिन ना कोई हिसाब-किताब है, ना पंचायत के खाते में इसकी कमाई का अता-पता।

“10 फीट गहरा कर डाला तालाब, बेचा सैकड़ों ट्रक मुरूम”

गांव के पूर्व पंच अमर दास टंडन ने बताया कि मांघी तालाब करीब 4 एकड़ में फैला हुआ है। इस तालाब की मिट्टी अलग किस्म की नहीं, बल्कि मुरूम है। ठेकेदारों और मशीन मालिकों की मिलीभगत से तालाब की सफाई के नाम पर 10 फीट तक खुदाई कर दी गई, जिससे सैकड़ों ट्रक मुरूम जेसीबी और पोकलेन मशीनों से निकाली गई और रात-दिन आसपास के क्षेत्रों में बेची जाती रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे कार्य में ना पंचायत के खाते में पैसा जमा हुआ, ना ग्रामीणों को कोई लाभ मिला। उल्टा, तालाब का प्राकृतिक स्वरूप खत्म कर दिया गया, जिससे जल-भंडारण क्षमता पर भी संकट खड़ा हो गया है। अमर दास टंडन ने कहा कि –  “तालाब में पानी भरने से पहले उसकी खुदाई की जांच होनी चाहिए। पता लगाया जाए कि कितनी मुरूम निकली और उसका पैसा कहां गया। जो भी राशि बनती है, उसे पंचायत खाते में जमा कर गांव के विकास में लगाना चाहिए।”

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1000 घन मीटर की अनुमति, पूरी खुदाई कर दी

जानकारी के मुताबिक, माइनिंग विभाग ने इस तालाब से सिर्फ 1000 घन मीटर मुरूम निकालने की अनुमति दी थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने पूरी तालाब की खुदाई कर दी। अमर दास टंडन कहते हैं कि यदि निकाली गई मुरूम का सही-सही आंकलन हो तो यह लाखों रुपए का घोटाला साबित होगा। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और खनिज विभाग की चुप्पी ने ग्रामीणों के गुस्से को और भड़का दिया है।

“रात को भी चलती रही खुदाई, कोई देखने वाला नहीं”

पूर्व पंच का कहना है कि – “रात को भी जेसीबी और पोकलेन मशीनें चलती रहीं। गांव वाले जागकर देखते थे, लेकिन खनिज विभाग, पंचायत सचिव या पटवारी – कोई देखने तक नहीं आया। क्या ये मिलीभगत नहीं तो और क्या है?”

तहसीलदार बोले – मामला माइनिंग विभाग का

तहसीलदार बाबूलाल कुरै, धरसीवा ने कहा कि यह मामला तहसील कार्यालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। 

“तालाब उत्खनन का मामला माइनिंग विभाग के पास गया है। विभाग ने कार्रवाई की है, इसलिए तहसील इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता।”

खनिज विभाग का जवाब गायब

खनिज विभाग के अधिकारी उमेश भार्गव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल कवरेज क्षेत्र से बाहर बताया गया। इस कारण विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी जानबूझकर फोन रिसीव नहीं कर रहे ताकि मामले को दबाया जा सके।

पंचायत सचिव ने नहीं उठाया फोन

ग्राम पंचायत सांकरा के सचिव रतन साहू से भी फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव और सरपंच ने आंख मूंद रखी है क्योंकि कहीं न कहीं उन्हें भी इसका हिस्सा मिला होगा।

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ग्रामीणों की चेतावनी – होगा उग्र आंदोलन

सांकरा के ग्रामीणों का गुस्सा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। गांव के युवाओं का कहना है कि यदि जल्द ही जांच नहीं कराई गई और मुरूम बिक्री का पैसा पंचायत खाते में जमा नहीं हुआ, तो वे सड़क जाम, पंचायत घेराव और विरोध प्रदर्शन करेंगे।

“हमारे तालाब को लूटा गया है। अब पैसा गांव के विकास में लगना चाहिए। नहीं तो आंदोलन होगा।” – ग्रामीण युवक

तालाब से लूट और गांव का सूखा भविष्य

तालाब की खुदाई से उसका प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गहराई के बाद मिट्टी की परत हट गई, जिससे बारिश का पानी रिसकर जमीन में नहीं जाएगा। इससे भविष्य में तालाब में पानी टिकने की जगह और भू-जल स्तर दोनों पर असर पड़ेगा।

सवाल उठते हैं…

  • क्या खनिज विभाग ने मौके पर मापन कराया?
  • पंचायत सचिव और सरपंच ने अनुमति किस आधार पर दी?
  • रात के समय खुदाई किसके आदेश से हुई?
  • लाखों की मुरूम बिक्री का पैसा गया कहां?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तालाब से निकली मुरूम, जेब में गया पैसा – यह आरोप ग्रामीणों की जुबान पर रहेगा। और यह मामला केवल सांकरा का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के तालाबों की लूट का आइना भी दिखा रहा है।


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