फिंगेश्वर में माफियाओं का जलवा – अवैध मुरम खनन से रोज़ाना करोड़ों की लूट, प्रशासन मूकदर्शक
गरियाबंद/फिंगेश्वर (गंगा प्रकाश)। फिंगेश्वर में माफियाओं का जलवा– जिले में अवैध खनन का काला कारोबार दिनदहाड़े चल रहा है और हैरानी की बात यह है कि जिला प्रशासन और खनिज विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं। फिंगेश्वर से लेकर भेन्डरी के आश्रित ग्राम सरगोड़ तक, JCB और पोकलेन मशीनों से 10 से 15 फीट गहराई तक मुरम की खुदाई हो रही है। माफिया ट्रकों और हाईवा में लोडिंग कर सीधा हाईवे से माल बाहर भेज रहे हैं — वो भी प्रशासन की नाक के नीचे!

ग्राम चैतरा – हाईवे पर खुलेआम लोडिंग, प्रशासन गायब
ग्राम चैतरा में कई दिनों से JCB मशीनें गड्ढा खोद-खोदकर मुरम निकाल रही हैं। हाईवे किनारे ट्रकों की लाइन लगती है और खुलेआम लोडिंग होती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर बैठे हैं। खनिज अधिकारी रोहित साहू से बात करने पर उन्होंने “आधे घंटे में पहुंचने” का आश्वासन दिया था, लेकिन कई घंटे बाद भी वे मौके पर नहीं दिखे।
सरगोड़ – तालाब चौड़ीकरण के नाम पर लूट, ग्रामीणों से छल
सरगोड़ गांव में आधी रात के अंधेरे में माफिया तालाब से मुरम निकाल रहे हैं। “तालाब चौड़ीकरण” का झांसा देकर कुछ ग्रामीणों से महज 20 हज़ार रुपए में सौदा किया गया, जबकि अंदरखाने नेताओं और माफियाओं के बीच लाखों का गुप्त लेनदेन हुआ। विरोध करने पर माफियाओं ने गुर्गे और लठैत खड़े कर दिए। अब रोज़ाना 50-60 हाईवा मुरम बाहर भेजी जा रही है।
खनिज विभाग और कलेक्टर की चुप्पी – क्या मिलीभगत का सबूत?
5 अगस्त को खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय बैरंग लौट गई। न कोई जांच, न कोई जब्ती। कलेक्टर गरियाबंद भगवान सिंह उइके ने मीडिया को बयान दिया – “अवैध खनन की जानकारी या शिकायत नहीं मिली, टीम बनाई है, दिखवाते हैं।” सवाल यह है कि जब ट्रकों की लंबी कतारें फिंगेश्वर थाना और तहसील के सामने से रोज़ गुजर रही हैं, तो यह “जानकारी” कैसे नहीं है?
सरपंच का बयान – पंचायत से अनुमति नहीं
भेन्डरी के सरपंच चुम्मन लाल सिन्हा का कहना है कि पंचायत ने किसी भी तरह की खुदाई की अनुमति नहीं दी। कुछ ग्रामीणों ने तालाब चौड़ीकरण के लिए सहमति दी थी, लेकिन यह अवैध खनन की सहमति नहीं थी।
रोज़ाना लाखों का राजस्व नुकसान
राजिम-नयापारा इलाके में एक हाईवा मुरम 10 से 15 हज़ार रुपए में बिक रही है। सिर्फ सरगोड़ और चैतरा में मिलाकर रोज़ाना लाखों की रॉयल्टी और जीएसटी चोरी हो रही है। इसका सीधा मतलब है — सरकारी खजाने को भारी नुकसान और माफियाओं की जेबें भर रही हैं।
गांव की सड़कें और खेत तबाह
माफियाओं ने गांव की सड़कों को गड्ढों में बदल दिया है। खेतों के बीच से जबरन रास्ता बनाकर हाईवा गुजारे जा रहे हैं, जिससे फसल बर्बाद हो रही है। किसानों की धान बोआई वाली जमीन तक खोद डाली गई है।
ग्रामीणों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन तुरंत कार्रवाई नहीं करता, तो वे गांव स्तर पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और राजनीतिक रसूखदारों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी लूट संभव ही नहीं।
फिंगेश्वर और आसपास के इलाकों में मुरम खनन माफिया बेलगाम हैं। प्रशासन की चुप्पी और खनिज विभाग की निष्क्रियता ने इन्हें और हिम्मत दी है। यह सिर्फ पर्यावरणीय विनाश नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व की खुलेआम लूट है। अब देखना है कि जिला प्रशासन कब जागता है, या फिर माफियाओं के आगे शासन-प्रशासन घुटने टेक चुका है।