Brekings:“संस्कृति के भेष में शैतान!  कन्या विद्यालय में घुसपैठ, गाली-गुंडागर्दी और जान से मारने की धमकी: क्या अब भी चुप रहेगा प्रशासन?….”

 

रायगढ़ (गंगा प्रकाश)। संस्कृति के भेष में शैतान!जिले के लैलूंगा तहसील में सब कुछ ठीक चल नहीं रहा हैं,आज छत्तीसगढ़ की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की नीति को तमाचा मारती एक शर्मनाक घटना ने संस्कृति और शिक्षा दोनों की चूलें हिला दी हैं। तुलाराम आर्य कन्या संस्कृत आवासीय विद्यालय, जो बेटियों की शिक्षा का मंदिर माना जाता है, वहीं शनिवार दोपहर एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे देखकर रावण भी शर्मा जाए।

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गुंडों ने स्कूल को बना दिया अखाड़ा! : पूर्व सभा प्रधान और छत्तीसगढ़ प्रांतीय आर्य प्रतिनिधि सभा से निष्कासित अंशुदेव आर्य, अपने पांच गुर्गों पंकज भोय, राधे पटेल, सम्राट महंत और दो अज्ञात साथियों को लेकर विद्यालय के भीतर बिना अनुमति घुस आया। और सीधे प्राचार्य कक्ष में बैठकर कब्जा कर लिया। जब महिला प्राचार्य ज्योति सतपथी ने आपत्ति जताई तो भाषा और व्यवहार ऐसा हुआ कि गुंडाराज भी शर्म से सिर झुका ले।

 “तुमलोग कुछ नहीं हो, चुपचाप निकलो नहीं तो मारकर फेंकवा देंगे… किसी को पता भी नहीं चलेगा”

— यही धमकी दी गई एक महिला प्राचार्य को, स्कूल परिसर के भीतर।

शिक्षा का मंदिर या राजनीति की मंडी? : इस घटना से साफ हो गया कि कुछ लोग आश्रम शिक्षा संस्थाओं को अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत वर्चस्व की बपौती समझ बैठे हैं। यह वही अंशुदेव है जिसके खिलाफ 21 अक्टूबर 2024 को भी शिकायत दर्ज हुई थी। मगर न तब प्रशासन जागा, न शिक्षा विभाग।

अब फिर वही चेहरा, वही गुंडई — और इस बार स्कूल की गरिमा तार-तार।

महिलाएं डरी नहीं, डटकर खड़ी हुईं : जब घटना हुई, उस वक्त प्राचार्य के साथ टिकेश्वरी बेहरा, प्रेमानंद आर्य, शांता तिग्गा, रम्भा आर्या जैसे कर्मचारी भी मौजूद थे ।

उन्होंने आरोपियों को रोकने की कोशिश की, मगर गुंडे धमकी देते हुए बोले:

“तुम सब यहां से भागो, वरना उठाकर बाहर कर देंगे… देख लेंगे किसने क्या किया।”

क्या लैलूंगा बना है ‘गुंडा संरक्षण क्षेत्र’? इस एफआईआर में दर्ज धाराएं केवल कानून की किताबों की शोभा बनकर रह जाएंगी, अगर लैलूंगा पुलिस और रायगढ़ प्रशासन अब भी नींद में रहे।

  • धारा 296
  • धारा 3(5), 331(5), 351(2)

इन धाराओं के बावजूद यदि आरोपी खुले घूम रहे हैं, तो यह सिर्फ कानून की कमजोरी नहीं, व्यवस्था की साजिश है।

और सबसे खतरनाक बात…

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विद्यालय में इस समय 2025 की पूरक परीक्षा की प्रक्रिया चल रही है। 10 जून अंतिम तिथि है फॉर्म जमा करने की। अगर ऐसे माहौल में छात्राएं परीक्षा नहीं दे सकीं, तो उनकी जिंदगी अंधेरे में धकेलने का दोष किसका होगा?

उत्तर साफ है: अंशुदेव और उसके गिरोह का, और उससे भी बड़ा दोषी वो सिस्टम जो बार-बार आंखें मूंद लेता है।

एक अपील, एक सवाल :

प्राचार्य, स्कूल स्टाफ और छात्राओं की ओर से सीधा सवाल:

  • क्या शिक्षा का मंदिर भी अब गुंडों के लिए ‘खुला मंच’ बन चुका है?
  • कब होगी इन अपराधियों की गिरफ्तारी?
  • कब मिलेगा कन्या विद्यालय को भयमुक्त माहौल?


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