डोंगरगढ़/बालाघाट। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमाओं पर फैले डोंगरगढ़–बालाघाट के घने जंगल सोमवार को एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठे। मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र की संयुक्त सुरक्षा टीम और नक्सलियों के बीच हुई इस भीषण मुठभेड़ में मध्यप्रदेश हॉकफोर्स के बहादुर निरीक्षक आशीष शर्मा शहीद हो गए।

यह मुठभेड़ उस समय हुई जब मोस्ट वांटेड नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने की खबर से पूरे सुरक्षा तंत्र में राहत का माहौल था। हिडमा की मौत की पुष्टि के सिर्फ एक दिन बाद सीमावर्ती जंगलों में नक्सलियों की सक्रियता बढ़ने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह केवल संयोग था या नक्सलियों की प्रतिशोधी प्रतिक्रिया?

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कैसे हुई मुठभेड़?

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों को डोंगरगढ़–बालाघाट के घने जंगलों में नक्सलियों की संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद हॉकफोर्स, छत्तीसगढ़ पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
इसी दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर फायरिंग शुरू कर दी और जवाबी कार्रवाई में भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। संघर्ष के दौरान हॉकफोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाने से पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ली।

क्या हिडमा की मौत से जुड़ा है यह हमला?

माडवी हिडमा दशकों से नक्सली गतिविधियों का मुखौटा चेहरा रहा है और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड बताया जाता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े नक्सली नेता की मौत के बाद आमतौर पर संगठन बदले की कार्रवाई या शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश करता है। ऐसे में डोंगरगढ़–बालाघाट इलाके में मुठभेड़ का समय-क्रम सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है, और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है ताकि नक्सली किसी भी प्रकार की बड़ी घटना को अंजाम न दे सकें।

निरीक्षक आशीष शर्मा: निडरता का प्रतीक

शहीद निरीक्षक आशीष शर्मा हॉकफोर्स के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने कई सफल अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उनकी शहादत पर मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस विभाग ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि राज्य उनके पराक्रम और बलिदान को हमेशा याद रखेगा।

इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई

मुठभेड़ के बाद तीनों राज्यों की संयुक्त टीमें जंगलों में सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं।
ड्रोन निगरानी, अतिरिक्त कंपनियां और स्थानीय खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है, ताकि नक्सलियों की किसी भी संभावित रणनीति को नाकाम किया जा सके।


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