87 साल की शांति बाई मिश्रा ने थामा तिरंगे का गौरव — गोवर्धन पारा रामजानकी वार्ड में उमड़ा देशभक्ति का ज्वार
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। 87 साल की शांति बाई मिश्रा ने थामा तिरंगे का गौरव — आजादी के 79वें पर्व पर गरियाबंद के गोवर्धन पारा रामजानकी वार्ड में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर दिल में देशप्रेम की ज्योत जगा दी।
तपती धूप और हल्की हवा के बीच, सुबह के करीब 9 बजे वार्ड के मुख्य चौक पर 87 वर्षीय शांति बाई मिश्रा ने तिरंगे को फहराकर सभी को गर्व से भर दिया। जैसे ही तिरंगा आसमान में लहराया, ढोल-नगाड़ों की थाप, बच्चों की तालियां और देशभक्ति नारों की गूंज ने माहौल को रोमांचित कर दिया।

पार्षद की अनोखी पहल — बुजुर्गों को मुख्य अतिथि का सम्मान
कार्यक्रम का आयोजन वार्ड पार्षद छगन लाल यादव की पहल पर किया गया। उनकी सोच है कि स्वतंत्रता दिवस का सम्मान सिर्फ बड़े पदों पर बैठे लोगों का नहीं, बल्कि उन हर नागरिकों का है जिन्होंने अपने जीवन में देश और समाज के लिए योगदान दिया है।
उन्होंने कहा — “हमारे मोहल्ले में हर साल किसी बुजुर्ग माता या पिता को मुख्य अतिथि बनाया जाता है। यह सम्मान उन्हें प्रेरणा और हम सबको गर्व देता है।”
शांति बाई की आंखों में छलक आया इतिहास
तिरंगा फहराने के बाद भावुक शांति बाई ने कहा — “मैंने देश को गुलामी से आज़ाद होते देखा है। हमें आज़ादी की कद्र करनी चाहिए। तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, यह हमारी अस्मिता और बलिदान की पहचान है।”
उनके चेहरे पर गर्व और आंखों में आंसू एक साथ चमक रहे थे।
वार्ड में मचा देशभक्ति का उत्सव
मुख्य कार्यक्रम के दौरान पूर्व पार्षद पदमा बाई यादव, बाबू लाल साहू, रामजी यादव, प्रदीप यादव, टिकेश्वर यादव, लच्छी यादव, परस राम धुरू, होरी यादव, संतोष यादव, त्रिलोक देवगन, परवीन यादव, शंतराम देवगन, जोहत सिन्हा, भगवती सिन्हा, प्रहलाद यादव, पिंटू यादव समेत सैकड़ों वार्डवासी मौजूद रहे।
बच्चों ने देशभक्ति गीत गाए, कविताएं पढ़ीं और नृत्य प्रस्तुत किए। बुजुर्गों ने स्वतंत्रता संग्राम के किस्से सुनाए, जिससे नई पीढ़ी को इतिहास से जुड़ने का अवसर मिला।
एकता और देशप्रेम का संदेश
अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और देश की एकता, अखंडता व प्रगति के लिए संकल्प लिया।
यह आयोजन सिर्फ एक झंडा फहराने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि देशभक्ति, सम्मान और सामुदायिक एकजुटता का जीवंत उदाहरण बन गया।