आन, बान, शान से लहराया तिरंगा — छुरा में राष्ट्रीय पर्व की भव्य धूम
छुरा (गंगा प्रकाश)। आन, बान, शान से लहराया तिरंगा – विकासखंड मुख्यालय छुरा में स्वतंत्रता दिवस का पर्व इस बार भी पूरे उल्लास, सम्मान और गौरव के साथ मनाया गया। रिमझिम फुहारों के बीच सुबह से ही नगर देशभक्ति के रंग में सराबोर हो उठा। आदर्श पूर्व माध्यमिक शाला छुरा के प्रांगण से निकली प्रभात फेरी में स्कूली बच्चों ने हाथों में तिरंगा थामकर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारे लगाते हुए मां भारती का यशगान किया। देशप्रेम की गूंज से पूरा नगर जाग उठा।

तीन प्रमुख स्थलों पर ध्वजारोहण
आजादी के 78वें वर्षगांठ के अवसर पर नगर के तीन प्रमुख स्थलों पर ध्वजारोहण किया गया।
- नगर पंचायत प्रांगण में अध्यक्ष श्रीमती लुकेश्वरी थानसिंग निषाद ने ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वीर जवानों के बलिदान को नमन किया।
- गांधी मैदान (शीतला मंदिर प्रांगण) में पार्षद संगीता अजय दीक्षित ने ध्वज फहराया।
- मुख्य परेड ग्राउंड में नगर पंचायत उपाध्यक्ष अब्दुल समीम खान (बाबा) ने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर आकर्षक मार्चपास्ट की सलामी ली।
बैंड की थाप और नन्हे कदमों की सामूहिक ताल पर पूरे छुरा में देशभक्ति का जुनून चरम पर था।
मुख्य अतिथियों का प्रेरक संदेश
ध्वजारोहण के बाद मुख्य अतिथि अब्दुल समीम खान ने कहा –“स्वतंत्रता दिवस मातृभूमि के प्रति सम्मान, प्रेम और गौरव का प्रतीक है। यह हमारे आत्मसम्मान और स्वतंत्र अस्तित्व का उत्सव है।”
अध्यक्षीय संबोधन में श्रीमती लुकेश्वरी थानसिंग निषाद ने कहा –“सैकड़ों वर्षों की गुलामी की जंजीरों को भगत सिंह, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस और असंख्य गुमनाम शहीदों की शहादत ने तोड़ा है। हमें इस आजादी पर गर्व है और हमें इसके संरक्षण के लिए एकजुट रहना होगा।”
सभापति भोलेशंकर जायसवाल ने भी राष्ट्रप्रेम का संदेश देते हुए कहा कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि भाव, संस्कार और बलिदान की मिसाल है। सच्चा देशवासी वही है जो व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रहित को रखता है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और ऐतिहासिक प्रस्तुति
स्कूली बच्चों ने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं में देशभक्ति गीत, कविताएं और भाषण प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में मौलिकता के साथ-साथ भावनात्मकता का समावेश था, जिसने मंच को ऊंचाई प्रदान की।
एक विशेष नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से छुरा नगर के नामकरण का इतिहास, कचना ध्रुवा महाराज की शौर्यगाथा और माता टेंगनाही के प्राकट्य की कथा को जीवंत रूप में मंचित किया गया, जिसे दर्शकों ने खड़े होकर सराहा।
शहीदों को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान आदर्श पूर्व माध्यमिक शाला के भूतपूर्व छात्र शहीद महेंद्र सिंह ध्रुव एवं शहीद राजेश कुमार ध्रुव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अमर शहीदों की गाथाओं का वाचन कर युवाओं को देश के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।
सम्मान और पुरस्कार वितरण
स्व. गजानंद प्रसाद देवांगन (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रधान पाठक) की स्मृति में नगर के बोर्ड परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र और प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।
इसके अलावा कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को पारितोषिक भेंट किए गए। सफल संचालन के लिए शिक्षक अर्जुन धनंजय सिन्हा को विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
विशिष्ट जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में पार्षद बलराज पटेल, रजनी लहरे, दीप्ति यादव, चित्ररेखा ध्रुव, गरिमा ध्रुव, यामीन ट्रांसजेंडर, हरीश यादव, सलीम मेमन, रामजी दीवान, शांतनु देवांगन, पंचराम टंडन, देवसिंग नेताम, राजा साहब यशपेन्द्र शाह, थानसिंग निषाद, रमेश शर्मा, नंद देवांगन, मानसिंग निषाद, सज्जन शर्मा, ईस्माइल मेमन, नियाज़ अहमद, नारायण पटेल, निखिल साहू, अब्दुल लक्की मेमन, हिमांशु देवांगन, कुश साहू, मेषनंदन पांडे, अजय चंद्राकर, गणेशु साहू, ललित साहू, प्राचार्य एनसी साहू, के के साहू, प्रदीप मिश्रा, एमएल साहू, निर्भय राम ठाकुर, मुरारी देवांगन, विनोद देवांगन, सीमा सिंह, चंद्रवती सिन्हा, भूपत कन्नौजे, अनीता चंद्राकर, थनेश्वरी यादव, संतोष वर्मा, डिगेश बघेल, लोवित रत्नाकर, संतोष निषाद, कृष्णेश यदु, जमीला खातून, सबीना नाज, श्यामा नेताम, चंद्रिका साहू, शीतल चंद्राकर, योगेश्वरी बंजारे, करुणा वर्मा, चंद्रभूषण निषाद, उमेश ढीढी, सुशील कुमार पांडे, टोपेश्वर साहू, केशव साहू, वीरेंद्र ठाकुर, जितेंद्र पाटकर, रामाधार यादव, मिथलेश सिन्हा, कमलेश्वर सिन्हा, मनोज दुबे, दीपक साहू, वेद प्रकाश, विष्णु निर्मलकर, दानेश्वर निर्मलकर, मेघराज यादव, सोहेब अली समेत सभी विद्यालयों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।
देशभक्ति के रंग में रंगा छुरा
बारिश की हल्की फुहार के बीच जब तिरंगा हवा में लहराया, तो नगर के कोने-कोने में एक ही संदेश गूंज रहा था — “यह तिरंगा हमारी आन, बान और शान है।”