आर्य समाज में गंगाधर कश्यप से विवाह का दावा, दूसरी शादी के बाद पहली पत्नी ने साथ रखने की मांग उठाई

जांजगीर-चांपा (गंगा प्रकाश)। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी किए जाने का एक मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पामगढ़ विकासखंड क्षेत्र के ग्राम चोरभट्टी निवासी गंगाधर कश्यप पर उसकी पहली पत्नी प्रिया ने आरोप लगाया है कि आर्य समाज में विधिवत विवाह होने के बावजूद उसे पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। वहीं, अब गंगाधर द्वारा दूसरी शादी किए जाने के बाद प्रिया ने सवाल उठाया है कि जब पति दूसरी पत्नी को अपने साथ रख सकता है तो उसे, जो स्वयं को पहली पत्नी बता रही है, क्यों नहीं रखा जा रहा है।

प्रिया के अनुसार गंगाधर कश्यप नौकरी के सिलसिले में रायपुर में रहता था। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय और प्रेम संबंध हुआ। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से आर्य समाज मंदिर में विवाह संपन्न हुआ। प्रिया का दावा है कि विवाह बाकायदा विधि-विधान से हुआ और उसके पास इस विवाह से संबंधित प्रमाण के रूप में आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाण-पत्र भी मौजूद है।

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प्रिया का कहना है कि विवाह के बाद उसे पति के परिवार की ओर से कथित तौर पर जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा। आरोप है कि उसे परिवार में स्वीकार करने में अनिच्छा दिखाई गई। इसके बावजूद प्रिया का कहना है कि उसने अपने वैवाहिक संबंध को बनाए रखने की कोशिश जारी रखी।

दूसरी शादी के बाद बढ़ा विवाद

मामले में नया मोड़ तब आया जब गंगाधर कश्यप द्वारा काजल वर्मा नामक युवती से सामाजिक रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किए जाने की बात सामने आई। प्रिया का आरोप है कि यह विवाह उस समय किया गया, जब उसका गंगाधर के साथ पहले से विवाह हो चुका था।

प्रिया के अनुसार गंगाधर और काजल के विवाह के संबंध में सामने आए फोटो सहित अन्य सामग्री अब उसके लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं। वहीं, आर्य समाज में गंगाधर के साथ हुए उसके कथित पहले विवाह का प्रमाण-पत्र भी उसने सामने रखा है।

पहले भी थाने तक पहुंचा था मामला

बताया जा रहा है कि गंगाधर और काजल के बीच संबंधों को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। प्रिया के अनुसार, काजल वर्मा द्वारा गंगाधर के खिलाफ मूलमुला थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई हुई और गंगाधर को जेल भी जाना पड़ा था। बाद में दोनों पक्षों के परिवारों के बीच बातचीत और समझौते के बाद उसे जमानत मिलने की बात कही जा रही है। इसके पश्चात दोनों का विवाह सामाजिक रीति-रिवाज से होने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और पूर्व प्रकरण में दर्ज धाराओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि संबंधित पुलिस एवं न्यायिक अभिलेखों से किया जाना आवश्यक है।

जब दूसरी पत्नी को रख सकते हैं तो मुझे क्यों नहीं?

प्रिया का कहना है कि वह अपने पति से किसी विवाद या टकराव की नहीं, बल्कि अपने वैवाहिक अधिकार और सम्मान की मांग कर रही है। उसका कहना है कि यदि गंगाधर ने उसके साथ विवाह किया था और वह पहली पत्नी है, तो उसे भी पत्नी के रूप में साथ रखने की जिम्मेदारी निभाई जानी चाहिए।

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प्रिया ने कहा कि उसके पास आर्य समाज में हुए विवाह का प्रमाण-पत्र मौजूद है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वास्तविक स्थिति क्या है और उसके वैवाहिक अधिकारों की रक्षा कैसे होगी।

अब प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर नजर

मामला सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि एक व्यक्ति ने पहले से विवाहित रहते हुए दूसरी शादी की है, तो इस संबंध में कानून क्या कहता है और संबंधित पक्षों के पास मौजूद दस्तावेजों की जांच के बाद क्या कार्रवाई बनती है।

हालांकि, दूसरी शादी वैध है या नहीं, यह तथ्य विवाह की परिस्थितियों, लागू व्यक्तिगत कानून, पहले विवाह की वैधता और अन्य कानूनी तथ्यों पर निर्भर करता है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष सक्षम न्यायालय या संबंधित जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल प्रिया अपने कथित पहले विवाह के प्रमाण-पत्र के साथ न्याय की गुहार लगा रही है। अब देखना यह होगा कि संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और दोनों पक्षों के कथनों की जांच कर क्या कदम उठाते हैं।

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