नगर से ग्रामीण अंचलों तक नशे की गिरफ्त में युवा; खेल मैदान, नदी-नालों और सुनसान जगहों पर जुट रही टोलियां, अभिभावकों ने पुलिस से की सख्त कार्रवाई की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले के छुरा थाना क्षेत्र में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की प्रवृत्ति अब गंभीर सामाजिक चिंता का विषय बनती जा रही है। नगर मुख्यालय से लेकर आसपास के ग्रामीण अंचलों तक युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने की बातें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि नगर के खेल मैदानों, नदी-नालों, जंगल-झाड़ियों, सुनसान स्थानों तथा चौक-चौराहों के आसपास अक्सर युवाओं की टोलियां दिखाई देती हैं। इनमें कुछ युवाओं द्वारा गांजा, शराब और सिगरेट का सेवन किए जाने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर सुबह से लेकर देर शाम तक 5-6 युवाओं से लेकर 8-10 युवाओं की टोलियां एक साथ बैठी नजर आती हैं। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य से जुड़ा गंभीर सामाजिक प्रश्न है।
जिस उम्र में भविष्य बनना चाहिए, उस उम्र में नशे की गिरफ्त
युवा किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। यही युवा आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सैनिक और विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारी संभालते हैं। लेकिन पढ़ाई और करियर बनाने की उम्र में यदि युवा नशे की ओर आकर्षित होने लगें तो इसका असर उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ पूरे परिवार और समाज पर पड़ सकता है।
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अभिभावकों का कहना है कि बच्चों में लगातार बदलती जीवनशैली और गलत संगत को लेकर वे चिंतित हैं। कई माता-पिता अपने बच्चों की गतिविधियों को लेकर परेशान रहते हैं, लेकिन बदलते सामाजिक माहौल के कारण उन्हें रोकने-टोकने में भी डर महसूस होता है। उन्हें आशंका रहती है कि कहीं बच्चों के साथ कोई अनहोनी न हो जाए या वे किसी गलत संगत में और अधिक न फंस जाएं।
आखिर युवाओं तक पहुंच रहा गांजा कहां से?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अवैध मादक पदार्थों की उपलब्धता को लेकर उठ रहा है। यदि युवाओं तक गांजा आसानी से पहुंच रहा है और उसका सेवन सार्वजनिक या सुनसान स्थानों पर किया जा रहा है, तो आखिर यह मादक पदार्थ आ कहां से रहा है?
पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। इसके बावजूद यदि नशे की सामग्री युवाओं तक पहुंच रही है, तो इसकी आपूर्ति करने वाले नेटवर्क का पता लगाना बेहद जरूरी है।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पुलिस केवल नशा करते पाए जाने वाले युवाओं तक कार्रवाई सीमित न रखे, बल्कि गांजा और अन्य अवैध मादक पदार्थों की बिक्री एवं सप्लाई करने वाले लोगों तक भी पहुंचे। सप्लाई के स्रोत का पता लगाकर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं तक नशे की सामग्री पहुंचने का रास्ता बंद हो सके।
चौक-चौराहों और सुनसान स्थानों पर बढ़ाई जाए निगरानी
अभिभावकों और नागरिकों का कहना है कि नगर के ऐसे स्थानों को चिन्हित करने की आवश्यकता है जहां अक्सर युवाओं की टोलियां बैठती हैं। खासकर खेल मैदान, नदी-नाले, जंगल-झाड़ी और नगर से लगे सुनसान क्षेत्रों में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन स्थानों पर समय-समय पर पुलिस की गश्त और निगरानी हो तो नशे की गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। इसके अलावा विद्यालयों और महाविद्यालयों के आसपास भी संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है।
शराब और नशे को लेकर परिवारों की बढ़ती चिंता
नशे की समस्या केवल गांजा या सिगरेट तक सीमित नहीं है। शराब की लत भी कई परिवारों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती है। नशे के कारण आर्थिक नुकसान, घरेलू विवाद, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक तनाव जैसी परिस्थितियां पैदा होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
अभिभावकों का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं होगी। परिवारों को भी बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना होगा और उन्हें खेल, शिक्षा, रोजगार तथा रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना होगा।
पुलिस की सक्रियता के बावजूद सवाल बरकरार
छुरा क्षेत्र में पुलिस द्वारा अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के बावजूद नशे के मामले में स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल हैं। यदि गांजा अवैध है तो इसकी उपलब्धता किस माध्यम से हो रही है? कौन लोग इसकी आपूर्ति कर रहे हैं? युवाओं तक इसे पहुंचाने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है? और क्या इस नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो रही है?
इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है। क्योंकि किसी युवा को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने से ज्यादा जरूरी है कि उसे नशे की गिरफ्त में पहुंचने से रोका जाए।
अभिभावकों की पुलिस प्रशासन से अपील
नगर के अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि छुरा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए। संवेदनशील और सुनसान स्थानों की पहचान कर नियमित पेट्रोलिंग की जाए। नशा करने वाले युवाओं की काउंसलिंग के साथ-साथ अवैध रूप से मादक पदार्थ बेचने और सप्लाई करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि आज उन्हें नशे से नहीं बचाया गया तो आने वाले समय में इसका खामियाजा परिवार और समाज दोनों को भुगतना पड़ सकता है।
नशे के खिलाफ सामूहिक लड़ाई की जरूरत
नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस, प्रशासन, अभिभावक, शिक्षक, जनप्रतिनिधि और समाज को मिलकर काम करना होगा। युवाओं को केवल डांटने या कार्रवाई करने के बजाय उन्हें नशे के दुष्परिणाम समझाने और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है।
छुरा क्षेत्र के नागरिकों की उम्मीद है कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर विषय को जनहित से जुड़े मुद्दे के रूप में लेते हुए प्रभावी कदम उठाएगा। साथ ही अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि छुरा के युवाओं का भविष्य नशे के अंधेरे में जाने से बचाया जा सके।
