‘शिक्षा की ट्रेन’ जैसे अभिनव प्रयोग ने दिलाई राज्य स्तर पर पहचान, शिक्षक दिवस पर लोक भवन में होगा सम्मान
सीमित संसाधनों में नवाचार से शिक्षा को बनाया रोचक और जीवंत, कोविड काल में भी विद्यार्थियों तक पहुंचाई पढ़ाई
गरियाबंद(गंगा प्रकाश)। शिक्षा को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर विद्यालय के पूरे वातावरण को विद्यार्थियों के लिए सीखने का माध्यम बनाने वाले गरियाबंद के सहायक शिक्षक गिरीश कुमार शर्मा का चयन राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 के लिए किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर लोक भवन में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों के नामों की घोषणा की।
गिरीश कुमार शर्मा के चयन की खबर सामने आते ही गरियाबंद जिले के शिक्षा जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से शिक्षण में नवाचार, तकनीक के उपयोग, विद्यार्थियों के साथ रचनात्मक गतिविधियों तथा सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले गिरीश शर्मा के कार्यों को राज्य स्तर पर मिली यह पहचान जिले के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।
विद्यालय को ही बना दिया ‘शिक्षा की ट्रेन’
गिरीश कुमार शर्मा की शिक्षकीय पहचान उनके अभिनव प्रयोग ‘शिक्षा की ट्रेन’ से विशेष रूप से बनी है। उन्होंने विद्यालय परिसर में ऐसा प्रिंट रिच वातावरण तैयार करने का प्रयास किया, जहां विद्यार्थी केवल कक्षा में बैठकर ही नहीं, बल्कि विद्यालय परिसर में चलते-फिरते भी सीख सकें।
विद्यालय के विभिन्न हिस्सों को ट्रेन के अलग-अलग डिब्बों की तरह सजाया गया। दीवारों, कक्षों और शैक्षणिक स्थानों पर ऐसी सामग्री प्रदर्शित की गई, जो विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी हो। इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ने, देखने और समझने की स्वाभाविक रुचि पैदा करना था।
‘दीवारें बोलें, परिसर सिखाए और हर कदम पर ज्ञान मिले’ की सोच के साथ तैयार इस अभिनव प्रयोग ने विद्यालय के वातावरण को जीवंत बनाने का काम किया। विद्यार्थियों के लिए स्कूल केवल पढ़ाई करने की जगह न रहकर ऐसा स्थान बना, जहां खेल-खेल में और आसपास की चीजों को देखकर भी सीखने के अवसर उपलब्ध हों।
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गिरीश शर्मा का मानना है कि यदि विद्यालय का वातावरण बच्चों के अनुकूल और ज्ञानवर्धक हो तो सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज एवं प्रभावी बन सकती है। इसी विचार को उन्होंने अपने प्रयोगों के माध्यम से जमीन पर उतारने का प्रयास किया।
2019 से लगातार मिल रहा सम्मान और प्रोत्साहन
गिरीश कुमार शर्मा के शैक्षणिक कार्यों को पिछले कई वर्षों से अलग-अलग स्तरों पर सम्मान मिलता रहा है। वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण के अंतर्गत शिक्षा दूत पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया।
इसके बाद ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ योजना में उत्कृष्ट कार्य के लिए 5 सितंबर 2020 एवं 2021 में तथा ‘पढ़ई तुंहर दुआर 2.0’ में उत्कृष्ट कार्य के लिए 26 जनवरी 2022 को उन्हें सम्मानित किया गया।
वर्ष 2023 में अकादमिक कार्य के लिए जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा द्वारा सम्मानित किया गया। इसी वर्ष जिला स्तरीय मातृ सम्मेलन में विशेष सहयोग के लिए भी 10 फरवरी 2023 को उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ।
5 सितंबर 2024 को शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें उत्कृष्ट शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 एवं 2026 में जिला स्तरीय योग दिवस समारोह में भी उनके योगदान को सम्मान मिला।
इन लगातार प्राप्त सम्मानों ने उनके शैक्षणिक कार्यों और नवाचारों को जिले में एक अलग पहचान दिलाई।
कोविड काल में भी नहीं रुकने दी विद्यार्थियों की पढ़ाई
कोविड-19 महामारी के दौरान जब विद्यालयों में नियमित कक्षाएं प्रभावित हो गई थीं और विद्यार्थियों की शिक्षा पर संकट खड़ा हो गया था, उस समय भी गिरीश शर्मा ने शिक्षण कार्य को जारी रखने के लिए तकनीक का सहारा लिया।
उन्होंने ऑनलाइन कक्षाओं, मोहल्ला क्लास और ‘पढ़ई तुंहर दुआर’ अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई। नियमित ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन एवं मोहल्ला क्लास के लिए स्कूल शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा उन्हें प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। कोविड काल में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिला प्रशासन की ओर से भी उन्हें प्रशस्ति-पत्र से सम्मानित किया गया।
उनकी सोच रही कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, विद्यार्थियों की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उपलब्ध संसाधनों और तकनीक का उपयोग करते हुए बच्चों से संपर्क बनाए रखा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी मिली उपलब्धियों की पहचान
गिरीश कुमार शर्मा को शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए विभिन्न राष्ट्रीय एवं प्रतिष्ठित मंचों पर भी सम्मान प्राप्त हुआ है।
अगस्त 2023 में इंदौर में आयोजित समारोह में उन्हें भारत श्री राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं दिसंबर 2023 में अयोध्या में आयोजित समारोह में उन्हें स्वदेश भारत गौरव सम्मान प्राप्त हुआ।
भोपाल में आयोजित समारोह में उन्हें भारत भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 14 जनवरी 2024 को रायपुर में आयोजित आचार्य चाणक्य स्मृति समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
इन उपलब्धियों के साथ-साथ विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक एवं सामुदायिक मंचों पर उनकी सक्रिय भागीदारी भी रही है।
शिक्षा के साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय
गिरीश शर्मा ने शिक्षण कार्य के साथ सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों में भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई है। जिलाधीश द्वारा आयोजित सद्भावना मैच में विशेष सहयोग के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
शासकीय वीर सुरेंद्र साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय गरियाबंद द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर में उन्होंने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। शून्य निवेश आधारित शैक्षणिक गतिविधियों, समावेशी शिक्षा शिविर तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भी उनका योगदान रहा है।
NIEPA द्वारा प्रशस्ति-पत्र, प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज संस्थान द्वारा शिक्षक दिवस पर सम्मान, ‘संवाद से समाधान’ शिविर में सहभागिता तथा शिक्षक साहित्य परिषद के सम्मान समारोह में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा सम्मान सहित अनेक उपलब्धियां उनके खाते में दर्ज हैं।
निर्वाचन कार्य में विशिष्ट योगदान के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सम्मान, जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह 2024 में जिला प्रशासन द्वारा प्रशस्ति-पत्र तथा वर्ष 2026 में राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा सम्मान भी उन्हें प्राप्त हुआ है।
उपलब्धियों की लंबी सूची बनी राज्य सम्मान की मजबूत पृष्ठभूमि
गिरीश शर्मा की उपलब्धियों को देखें तो उनका कार्यक्षेत्र केवल नियमित शिक्षण तक सीमित नहीं रहा। अकादमिक कार्य, नवाचार, ऑनलाइन शिक्षा, समावेशी शिक्षा, शून्य निवेश आधारित गतिविधियां, सामाजिक सहभागिता, निर्वाचन कार्य, योग, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को समय-समय पर सराहा गया है।
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विशेष रूप से ‘शिक्षा की ट्रेन’ जैसी अवधारणा यह दर्शाती है कि उन्होंने बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को उनके आसपास के वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया। विद्यालय की दीवारों और परिसर को ही शिक्षण सामग्री का माध्यम बनाने की यह पहल विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी।
चयन की खबर से शिक्षा जगत में उत्साह
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 के लिए गिरीश शर्मा के चयन की घोषणा के बाद जिले के अधिकारियों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई दी है।
जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर, शासकीय वीर सुरेंद्र साय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. आर.के. तलवरे, नवीन कन्या महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रो. जी.एस. दास, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा शिवेश शुक्ला, गौरव गरियाबंद नोडल श्याम चंद्राकर, सहायक परियोजना अधिकारी बुद्ध विलास सिंह, विकासखंड शिक्षा अधिकारी गजेंद्र ध्रुव, संकुल प्राचार्य वंदना पांडे सहित अनेक शिक्षकों एवं अधिकारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
इसके अलावा प्राचार्यगण बंटी राय, शबाना मेम, व्याख्याता रेखा शुक्ला, ब्लॉक नोडल संजीव साहू, सहायक प्राध्यापक सी.एल. तारक, डॉ. नीलाम्बर पटेल, चंद्रभान पटेल, डॉ. सत्यम कुंभकार, परमेश्वर निर्मलकर, नितिन वखारिया, नंदकुमार रामटेके, दल प्रसाद साहू, सूरज राव महाडिक, देवेन्द्र पांडे, दीपक सरवैया, व्यंकटेश साहू, ज्ञानेन्द्र शर्मा, सलीम मेमन, लकेश साहू, चैन सिंह यादव, देवेन्द्र कांशी, लोकेश सोनवानी, नारायण चंद्राकर, दानवीर साहू, जितेन्द्र सोनवानी, शिव साहू, गीता चंद्राकर, टी. आमदे, मीना यादव सहित अनेक अधिकारियों, शिक्षकों एवं शुभचिंतकों ने बधाई दी।
‘सम्मान का श्रेय माता-पिता और सहयोगियों को’
राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए अपना नाम घोषित होने पर गिरीश कुमार शर्मा ने अपनी उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के आशीर्वाद, उच्चाधिकारियों के उत्साहवर्धन, साथी शिक्षकों, शुभचिंतकों एवं परिजनों के स्नेह और मार्गदर्शन को दिया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षण कार्य में मिलने वाला हर प्रोत्साहन उन्हें विद्यार्थियों के लिए और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है। उनके लिए शिक्षक का सबसे बड़ा उद्देश्य बच्चों में सीखने की जिज्ञासा और आत्मविश्वास पैदा करना है।
गरियाबंद के लिए गौरव का क्षण
गिरीश कुमार शर्मा का राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान-2026 के लिए चयन उनके व्यक्तिगत शिक्षकीय जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि होने के साथ-साथ पूरे गरियाबंद जिले के लिए गौरव का विषय है।
एक ओर उन्होंने कोविड जैसे कठिन दौर में तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाई, वहीं दूसरी ओर विद्यालय के वातावरण को ही सीखने का माध्यम बनाने के लिए ‘शिक्षा की ट्रेन’ जैसे नवाचार को जमीन पर उतारा।
अब गरियाबंद की ‘शिक्षा की ट्रेन’ राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाएगी। गिरीश शर्मा का चयन उन शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में नवाचार और रचनात्मक सोच के माध्यम से शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। उनका यह सम्मान जिले की शैक्षणिक उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रहा है।
