पीएम श्री अकलवारा प्राथमिक विद्यालय के अभिलेखों पर उठे सवाल, मिस्त्री चार्ज से लेकर सीमेंट-रेत और वाहन किराये तक जांच की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। विकासखंड छुरा के ग्राम अकलवारा स्थित पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2024 के दौरान किए गए विभिन्न भुगतानों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध बिल-वाउचर एवं कैशबुक में दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर आरोप है कि कई मदों में भुगतान तो दर्ज है, लेकिन खरीदी गई सामग्री का वास्तविक उपयोग किस कार्य में हुआ, कार्य की स्वीकृति किस स्तर से मिली और संबंधित कार्य में श्रम भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड क्या है—इन बिंदुओं पर अभिलेखों में पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई देती। मामले में अब मूल दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
जानकारी के अनुसार फरवरी 2024 में विद्यालय के नाम से 27 बैग सीमेंट, 19 ट्रैक्टर मिट्टी और चार ट्रैक्टर रेत की खरीदी का भुगतान दर्ज होने की बात सामने आई है। इन सामग्रियों का उपयोग विद्यालय परिसर में किस कार्य के लिए किया गया, इसका स्पष्ट विवरण संबंधित भुगतान अभिलेखों में दर्ज है या नहीं, यह जांच का विषय बताया जा रहा है। इसी तरह विद्यालय में चित्रकारी के नाम पर करीब 30 हजार रुपये भुगतान की जानकारी है। चार छोटे कक्षों वाले भवन की चित्रकारी के क्षेत्रफल और भुगतान राशि का भौतिक सत्यापन भी आवश्यक बताया जा रहा है।
पेंट से लेकर राशन सामग्री तक, रिकॉर्ड में दर्ज कई खरीदारियां
अभिलेखों में 82 लीटर प्लास्टिक पेंट और 75 किलोग्राम बिरला व्हाइट के अलावा निरमा वाशिंग पाउडर, शक्कर, आलू, प्याज, लहसुन, उड़द दाल और चावल जैसी सामग्री की खरीदी का उल्लेख होने की बात कही जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि इन सामग्रियों की खरीदी किस योजना अथवा गतिविधि के तहत की गई और इनके उपयोग का प्रमाणित रिकॉर्ड विद्यालय के पास उपलब्ध है या नहीं।
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पांच कक्षाओं वाले विद्यालय में 14 नग डस्टबिन के लिए करीब आठ हजार रुपये तथा आठ बाल्टियों की खरीदी का भुगतान भी जांच के दायरे में बताया जा रहा है। विद्यालय भवन के नाम-पेंटिंग के लिए फरवरी और मार्च 2024 में अलग-अलग पेंटरों को दो बार भुगतान किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं शौचालय की पेंटिंग के नाम पर करीब छह हजार रुपये खर्च दर्ज होने की बात कही गई है।
दुकानदार के बिल में मिस्त्री चार्ज ने बढ़ाया सवाल
मुडागांव स्थित एक दुकान के बिल से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि छड़-सीमेंट की सामग्री के फर्म बिल में करीब 6,900 रुपये का मिस्त्री चार्ज भी शामिल कर भुगतान किया गया। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि मिस्त्री शुल्क किस कार्य के लिए दिया गया, कार्य कहां कराया गया, उसकी माप किसने की और कार्य पूर्णता का प्रमाण किस अधिकारी ने दिया।
60 किलोमीटर की यात्रा और पांच हजार रुपये वाहन किराया
विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक कमल सिन्हा द्वारा गृह ग्राम सोरिद से अकलवारा होते हुए गरियाबंद आने-जाने के लिए आर्टिका वाहन का करीब 60 किलोमीटर का किराया पांच हजार रुपये भुगतान किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। साथ ही वाहन किराये की निर्धारित दर और भुगतान की गई राशि के बीच अंतर होने का दावा किया जा रहा है। इस भुगतान की जांच में वाहन की लॉगबुक, यात्रा का उद्देश्य, स्वीकृति आदेश, परमिट और वास्तविक दूरी का सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जवाब के लिए फोन किया, नहीं मिला प्रतिसाद
मामले में विद्यालय के प्रभारी प्रधान पाठक कमल सिन्हा का पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद भेजे गए मैसेज का भी समाचार लिखे जाने तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
अधिकारी बोले—मामला गंभीर, जल्द गठित होगी जांच टीम
मामले को लेकर जिला मिशन समन्वयक डीपीसी शिवेश शुक्ला ने कहा कि मामला गंभीर है। शीघ्र जांच टीम गठित कर जांच कराई जाएगी। जांच के उपरांत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि अभिलेखों में दर्ज सामग्री वास्तव में विद्यालय में पहुंची थी या नहीं, उसका उपयोग किन कार्यों में हुआ, भुगतान से पहले किस स्तर पर सत्यापन किया गया तथा प्रत्येक भुगतान के समर्थन में आवश्यक मूल दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं। यदि जांच में अनियमितता अथवा सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
