छुरा/गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद ज़िले के छुरा अंचल का कसेकेरा गाँव इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहाँ कबीर पंथ की राह पर चलने वाले एक परिवार को गाँव के दबंगों ने समाज से पूरी तरह काट दिया। परिवार को हुक्का-पानी से लेकर खेत-खार और मजदूरी तक से वंचित कर दिया गया।
सबसे बड़ा सदमा तब लगा जब लगातार अपमान और मानसिक तनाव से राय सिंह साहू की मौत हो गई। लेकिन मौत पर शोक जताने की बजाय दबंगों ने बकरा कटवाकर दावत उड़ाई और जश्न मनाया।

आस्था पर हमला
परिवार का कसूर सिर्फ इतना था कि वे हिंदू धर्म के साथ-साथ कबीर पंथ में भी आस्था रखते थे। यही आस्था गाँव के दबंगों को नागवार गुज़री। पंचायतनुमा बैठकों में ऐलान हुआ –“इनसे कोई मेलजोल नहीं करेगा, खेत-खार और लेन-देन सब बंद।”
अपमान और मौत
परिवार का आरोप है कि राय सिंह साहू को बार-बार ग्रामसभा में बुलाकर बेइज्जत किया गया। उनसे कहा गया – “अपने बेटों और बहुओं से नाता तोड़ो, वरना समाज से बाहर रहो।”
लगातार अपमान और दबाव के चलते राय सिंह टूटते गए और उनकी असमय मौत हो गई।
मौत पर दावत
राय सिंह की मौत के बाद आरोपियों का अमानवीय चेहरा सामने आया। शोक व्यक्त करने की बजाय उन्होंने बकरा कटवाकर दावत उड़ाई। यह कृत्य पूरे गाँव में चर्चा का विषय बन गया और परिवार के घाव और गहरे हो गए।
गाँव में जीना हुआ मुश्किल
परिवार का कहना है कि उन्हें खेत में काम करने से लेकर मजदूरी, पौनी-पसारी और दैनिक जरूरतों तक से रोका जा रहा है। परिवार की पीड़ा है – “गाँव में जीना दूभर हो गया है, हमें इंसान नहीं समझा जा रहा।”
प्रशासन मौन, दबंग बेलगाम
परिवार ने थाना छुरा, पंचायत और जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक तक शिकायतें कीं। यहाँ तक कि कानूनी नोटिस भी भेजा गया। लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक सिर्फ चुप्पी है। दबंग खुलेआम नई-नई पाबंदियाँ थोप रहे हैं।
बड़े सवाल
- क्या कबीर पंथ में आस्था रखना अपराध है?
- क्या प्रशासन की चुप्पी ही दबंगों का हौसला नहीं बढ़ा रही?
- गरियाबंद जिला प्रशासन कब देगा पीड़ित परिवार को न्याय?
कसेकेरा की यह घटना सिर्फ एक गाँव की कहानी नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक दबंगई की टक्कर का आईना है।