सचिव ममता साहू पर गंभीर आरोप, उपसरपंच–पंच के परिवार के नाम पर हुआ संदिग्ध भुगतान, कलेक्टर-सीईओ से उच्च स्तरीय जांच की मांग
छुरा (गंगा प्रकाश)। फर्जी बिल घोटाला : आदिवासी बाहुल्य ब्लॉक छुरा के ग्राम पंचायत फुलझर से बड़ा घोटाला सामने आया है। पंचायत सचिव ममता साहू पर आरोप है कि उन्होंने शासन द्वारा ग्राम विकास के लिए प्रदत्त लाखों रुपए की राशि को फर्जी बिलों के सहारे हड़प लिया। नियम-कायदों को ताक पर रखकर किए गए इन भुगतानों में उपसरपंच की पत्नी चम्पा बाई, पंच और पंच पति के नाम शामिल हैं।
मीडिया के हाथ लगे दस्तावेज़ों से साफ है कि पंचायत सचिव ने पंचायती राज अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने ढंग से भुगतान कर शासन के खजाने को चुना लगाया। यह पूरा प्रकरण न केवल गंभीर आर्थिक अनियमितता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह से पंचायत स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी मिलकर भ्रष्टाचार का खेल खेल रहे हैं।

सचिव की कारगुजारी पर गंभीर सवाल
ग्राम पंचायत फुलझर की सचिव ममता साहू पर पहले से ही भ्रष्टाचार में संलिप्त रहने के आरोप लगते रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सचिव लंबे समय से फर्जी बिल, फर्जी हस्ताक्षर और मनमानी भुगतान प्रक्रिया के जरिए सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रही हैं। इस बार तो उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए पंच और उपसरपंच परिवार के नाम पर ही राशि का आहरण कर लिया।
जांच की मांग तेज
मामले की शिकायत अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, इंद्रावती भवन रायपुर, जिला कलेक्टर गरियाबंद, जिला पंचायत सीईओ और जनपद सीईओ से की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने कलेक्टर और सीईओ से फोन पर बात करनी चाही तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया, लेकिन व्हाट्सएप के माध्यम से सबूत भेज दिए गए हैं।
सचिव और सरपंच का वर्जन
ममता साहू, सचिव ग्राम पंचायत फुलझर
“नियम को नहीं जानती। भुगतान कार्य के हिसाब से हुआ है।”
संतोष दीवान, सरपंच ग्राम पंचायत फुलझर
“मामले में उस तरह की जानकारी नहीं है। सचिव प्रशासनिक कर्मचारी है, उसे नियम पता है। मैं नया सरपंच हूं, मुझे उन चीजों की जानकारी नहीं है।”
बड़ा सवाल – कब होगी कार्रवाई?
ग्राम पंचायत फुलझर का यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह बताता है कि पंचायत सचिवों के हाथों में कितना बिना रोकटोक का अधिकार है। सरपंच खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें जानकारी नहीं है, ऐसे में सचिवों का मनमाना रवैया गांवों के विकास को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, यह बड़ा सवाल है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और पंचायत विभाग इस घोटाले पर कब संज्ञान लेता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।