CG: ढाई महीने से न्याय की तलाश में छात्र, लैपटॉप चोरी से पढ़ाई ठप – सिस्टम की लाचारी का उजागर सच

 

रायगढ़ (गंगा प्रकाश)।ढाई महीने से न्याय की तलाश में छात्र,केवल किताबों से नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे के माहौल से अपना भविष्य गढ़ते हैं। पर जब उस भरोसे को ही कोई चुरा ले, तब वह छात्र अकेला ही नहीं, पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा नजर आता है। ऐसा ही एक मामला रायगढ़ से सामने आया है, जहां कृषि महाविद्यालय रायगढ़ के छात्र का लैपटॉप चोरी होने के ढाई महीने बाद भी पुलिस खाली हाथ है, और छात्र न्याय के लिए हर रोज़ दर-दर भटकने को मजबूर है।

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सरिया थाना क्षेत्र के ग्राम कारीगाठी निवासी यह छात्र, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी मोदीनगर रायगढ़ के मकान क्रमांक U1 में किराए पर रहकर बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई के लिए उसने वर्ष 2023 में 50,000 रुपये का आसुस कंपनी का लैपटॉप खरीदा था। सीमित संसाधनों, कमजोर पारिवारिक आय और कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई कर रहे इस छात्र के लिए वह लैपटॉप उसकी सबसे बड़ी शैक्षणिक संपत्ति थी।

7 अप्रैल 2025 की सुबह, छात्र परीक्षा देने कॉलेज गया। जब दोपहर को लौटा, तो उसके होश उड़ गए। उसका लैपटॉप कमरे से गायब था। कमरे में कोई तोड़फोड़ नहीं थी, न ही ताला टूटा था। रूम पार्टनर कमरे में मौजूद था, लेकिन वह भी यह बताने में असमर्थ रहा कि चोरी कब और कैसे हुई। यह बात भी सवाल खड़े करती है – क्या चोरी बाहरी व्यक्ति ने की, या फिर मामला कमरे के अंदर से ही जुड़ा है?

9 अप्रैल को छात्र ने चक्रधरनगर थाने में लिखित शिकायत दी, लेकिन एफआईआर दर्ज होने में भी 6 दिन लग गए। 15 अप्रैल को जब एफआईआर दर्ज हुई, तब तक छात्र की उम्मीदें आधी टूट चुकी थीं, क्योंकि पढ़ाई का नुकसान शुरू हो चुका था। लैपटॉप के बिना न तो क्लास नोट्स की तैयारी हो पा रही थी, न ही प्रैक्टिकल असाइनमेंट पूरे हो रहे थे। वह लैपटॉप छात्र के लिए केवल मशीन नहीं, उसका क्लासरूम, लाइब्रेरी, और भविष्य की तैयारी का साधन था।

ढाई महीने से हर बार वही जवाब – “बरामदगी होने पर सूचित कर देंगे”

छात्र का कहना है,

“मैं हफ्ते में 2-3 बार थाना जाता हूं। हर बार यही जवाब मिलता है – बरामदगी होने पर बता देंगे। कोई पूछता तक नहीं कि मेरी पढ़ाई कैसे चल रही है। अगले महीने प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट जमा करना है, पर बिना लैपटॉप के कुछ नहीं कर पा रहा हूं।”

छात्र का दर्द केवल उसका व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि यह सिस्टम की लाचारी को उजागर करता है। पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज, मकान के अन्य किरायेदारों के बयान, रूम पार्टनर से पूछताछ जैसे कई विकल्प थे, लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

सवाल कई, जवाब एक भी नहीं

  1. यदि कमरे में कोई तोड़फोड़ नहीं थी तो चोरी कैसे हुई?
  2. रूम पार्टनर की मौजूदगी में लैपटॉप गायब होना किस ओर इशारा करता है?
  3. एफआईआर दर्ज करने में 6 दिन क्यों लगे?
  4. ढाई महीने की जांच में पुलिस ने क्या किया, क्या नहीं किया – इसका जवाब कौन देगा?

इस पूरे मामले ने छात्रों में असुरक्षा की भावना को जन्म दिया है। कृषि महाविद्यालय और अन्य कॉलेजों के छात्रों का कहना है कि वे पढ़ाई के लिए हजारों रुपये का सामान, लैपटॉप, मोबाइल साथ लाते हैं, लेकिन अगर चोरी हो जाए तो पुलिस से मदद मिलना लगभग नामुमकिन है। कई छात्रों ने यह भी कहा कि वे अब महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कमरे में रखने से डरने लगे हैं।

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सिस्टम की विफलता – छात्र का भविष्य अधर में

भारत जैसे देश में जहां शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार कहा जाता है, वहां लैपटॉप जैसी मूलभूत शैक्षणिक जरूरत की चोरी भी छात्र के सपनों की हत्या के समान है। इस छात्र का कहना है,

“मेरे पापा किसान हैं। किसी तरह कर्जा लेकर लैपटॉप दिलवाया था। अब दूसरा लेना नामुमकिन है। अगर जल्दी बरामद नहीं हुआ तो मेरी पढ़ाई छूट जाएगी।”

प्रशासन और पुलिस से सवाल

  • क्या गरीब, गांव से आए छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा?
  • जांच में तेजी लाकर छात्र का लैपटॉप लौटाया जाएगा या यह केस भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

छात्रों का संदेश

यह घटना पूरे सिस्टम को आईना दिखाती है कि भरोसे के बिना पढ़ाई और पढ़ाई के बिना भविष्य संभव नहीं। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि इस प्रकरण को जल्द से जल्द हल करे ताकि छात्र के सपनों पर लगा ताला टूटे और उसका भविष्य फिर से खुल सके।

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